मासूमों की जान ले रहे कुत्ते, पांच साल में आधे की ही हो पाई नसबंदी, जबकि इतनी हैं संख्या

मासूमों की जान ले रहे कुत्ते, पांच साल में आधे की ही हो पाई नसबंदी, जबकि इतनी हैं संख्या

Reena Sharma | Publish: May, 13 2019 02:16:43 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

भोपाल की घटना के बाद तेज किया काम, अब निगम जोन वार कर रहा ऑपरेशन

इंदौर. भोपाल में आवारा कुत्तों ने एक मासूम की जान ले ली, वहीं इंदौर में आवारा कुत्तों का खौफ बना हुआ है। नगर निगम आवार कुत्तों पर नियंत्रण में नाकाम रहा है। पांच साल में महज आधे कुत्तों की नसबंदी भी नहीं कर पाया है। हालांकि निगम अफसर दावा कर रहे हैं कि उन्होंने नसबंदी का तरीका बदला है, जिसका नतीजा भी सामने आने लगा है।

निगम शहर में लगभग 95 हजार से एक लाख आवारा कुत्ते मानकर काम कर रहा है। इनकी आबादी पर नियंत्रण के लिए पांच साल से ज्यादा समय से काम कर रहा है, लेकिन महज ५५ हजार कुत्तों की नसबंदी ही कर पाया है। कुत्तों को आक्रामक होने से रोकने के लिए निगम के पास कोई तरीका नहीं है।

8 जोन कर चुके नसबंदी

निगम ने जोन 1, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14 के कुत्तों की नसबंदी किए जाने का दावा किया है, जबकि जोन 15 और 7 में काम जारी है। निगम औसतन 25 दिनों में एक जोनल कार्यालय क्षेत्र के सभी कुत्तों की नसबंदी कर पा रहा है।
ये भी आ रही हैं दिक्कतें कुत्तों की गाड़ी जब उन्हें पकडऩे किसी क्षेत्र में जाती है तो अधिकतर कुत्ते भाग जाते हैं।

केवल 6 माह से बड़े कुत्तों की ही नसबंदी की जा सकती है। ऐसे में कई कुत्तों को पकडऩे के बाद वापस भी छोडऩा पड़ता है। भूखे कुत्तों के लिए रखे कटोरे भी गायब : शहर में आवारा कुत्तों के आक्रामक होने के मुख्य कारणों में उन्हें खाना नहीं मिलना भी है। निगम ने साकेत व सूर्यदेवनगर में सीमेंट के कटोरों में आवारा कुत्तों के लिए पानी और खाना रखने की व्यवस्था की थी, लेकिन दोनों जगह दूसरे दिन ही चोरी हो गए। अब निगम शहर में मुख्य सडक़ों के किनारे लगे लिटरबिन के नीचे इसकी व्यवस्था करने पर विचार कर रहा है।

निगम ने बदला कुत्तों की नसबंदी का तरीका

प हले निगम शिकायतों के आधार पर ही कुत्तों को पकडक़र नसबंदी कर रहा था, लेकिन उसमें लंबा समय और पैसा लगने के बाद भी कुत्तों की आबादी नियंत्रित नहीं हो रही थी। कुत्तों को जिस क्षेत्र में पकड़ा गया, वहां बाहर से कोई कुत्ता आ जाने से नसबंदी का मतलब नहीं रह जाता। अब निगम ने जोनवार कुत्तों की नसबंदी करने का निर्णय लिया है। तय किया गया है, एक जोन के सभी वार्डों के कुत्तों की पूरी तरह नसबंदी करने के बाद ही दूसरे जोन क्षेत्र में कुत्तों को पकड़ा जाएगा। निगम ने संसाधन भी बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले शहर के कुत्तों की केवल ट्रेंचिंग ग्राउंड पर चार डॉक्टर नसबंदी करते थे, अब एक और सेंटर जीपीओ पशु चिकित्सालय के पास भी तैयार कर चार डॉक्टर नसबंदी के काम में लगाए गए हैं। शहर में आवारा कुत्तों को पकडऩे वाली गाडिय़ों की संख्या 2 से बढ़ाकर 4 कर दी है। 16 की जगह 32 कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है।

शिकायतों में आई कमी : कुछ समय से निगम में आवारा कुत्तों को लेकर शिकायतों में काफी कमी आई है। पहले जहां रोज 25 से 30 शिकायतें मिलती थीं, वहीं अब महज ५ से ६ रह गई हैं।

नहीं हो पाया श्वानशाला का प्रोजेक्ट

निगम ने शहर से आक्रामक कुत्तों को पकडक़र ट्रेंचिंग ग्राउंड पर रखने की योजना तैयारी की थी। यहां निगम बड़े शेड में श्वानशाला तैयार करने की योजना बना रहा था, लेकिन एनजीओ द्वारा कुत्तों की देखभाल को लेकर आपत्ति लेने के बाद इस प्रोजेक्ट से हाथ खिंच लिए।

-हमने जोनवार कुत्तों की नसबंदी करना तय किया है। ये सही है, कई जगह सभी कुत्तों की नसबंदी नहीं हो पाती। एक जोन में सभी कुत्तों की नसबंदी के बाद वहां फिर बिना नसबंदी किए कुत्तों की जानकारी लेते हैं। ऐसे कुत्ते मिलतेे ही नसबंदी की जाएगी। इसकी दो साल मॉनिटरिंग करेंगे।

-डॉ. उत्तम यादव, प्रभारी, एंटी-बाइड डॉग

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