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हर इंजीनियरिंग स्टूडेंट सफल क्यों नहीं हो पाता, स्टडी में हुआ खुलासा

हाल ही में हुए एक सर्वे में आया है कि 80 इंजीनियर नौकरी के काबिल नहीं। पत्रिका उत्तरप्रदेश ने एक्सपर्ट्स से जाना यूपी में क्या स्थिती है।

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Prashant Srivastava

Jan 27, 2016

लखनऊ. देश में हर साल लगभग 15 लाख इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स पास आउट होते हैं। इनमें से कई सफल इंजीनियर बन जाते हैं तो कइयों के सपने कोर्स खत्म होने के साथ ही खत्म हो जाते हैं। विभिन्न मु्द्दों का मूल्यांक करने वाली संस्था ऐस्पायरिंग माइंड्स की नैशनल एंप्लॉयबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार 80 प्रतिशत इंजीनियरिंग ग्रैजुएट नौकरी के काबिल नहीं है। रिपोर्ट 650 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेजों के 1,50,000 इंजीनियरिंग छात्रों की स्टडी पर आधारित है जो 2015 में पास आउट हुए हैं।

एस्पाइरिंग माइंड्स के सीटीओ वरुण अग्रवाल ने कहा, ‘‘आज बड़ी संख्या में छात्रों के लिये इंजीनियरिंग वास्तव में स्नातक की डिग्री बन गया है। हालांकि शिक्षा मानकों में सुधार के साथ यह जरूरी हो गया है कि हम अपने अंडरग्रैजुएट कार्यक्रम को तैयार करें ताकि वे रोजगार के ज्यादा काबिल हो सके.’’ रिपोर्ट के अनुसार शहरों के हिसाब से दिल्ली के संस्थान सर्वाधिक रोजगार के काबिल इंजीनियर दे रहे हैं. उसके बाद क्रमश: बेंगलुरु का स्थान है।

यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट


यूपी में भी स्थिति ठीक नहीं

यूपी के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी(एकेटीयू) की गिनती देश में बड़े तकनीकि शिक्षण संस्थानों में होती है। यूनिवर्सिटी में लगभग 4.5 लाख स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। हर साल लगभग एक लाख इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स यहां से पास आउट होते हैं। इस यूनिवर्सिटी के एग्जाम कंट्रोलर बीएन मिश्रा के मुताबिक लगभग 40-45 प्रतिशत स्टूडेंट्स का प्लेसमेंट हो जाता है। इनमें से कई स्टूडेंट्स प्लेसमेंट नहीं लेते और आगे की पढ़ाई करते हैं। लगभग 20-25 प्रतिशत इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स बीटेक की पढ़ाई के बाद हायर स्टडीज या कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की प्रिपरेशन करते हैं। इनमें मेधावी छात्रों की संख्या भी काफी है।

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टॉपर्स प्रिफर करते हैं आगे पढ़ना


पत्रिका उत्तर प्रदेश ने बीते दिनों एकेटीयू के टॉपर्स पर एक स्टोरी की थी जिसमें बताया गया था कि अधिकतर टॉपर्स प्लेमेंट के बजाए आगे की पढ़ाई करना प्रिफर कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के एग्जाम कंट्रोलर बीएन मिश्रा इस बात से काफी हद तक इत्तेफाक रखते हैं। उनका कहना है कि लगभग 30 से प्रतिशत बच्चों को इंजीनियर की नौकरी नहीं मिल पाती या यूं कहें कि वे इसके काबिल नहीं होते।

AKTU के 2015 बैच के बीटेक पास आउट संतोष शर्मा का कहना है कि ऐसा नहीं कि 80 प्रतिशत स्टूडेंट्स इंजीनियर बनने के काबिल नहीं होते। ये बात सच है कि कई लोग केवल डिग्री लेने के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हैं लेकिन कई ऐसे स्टूडेंट्स हैं जो सीरियसली एक सफर इंजीनियर बनने की चाहत रखते हैं। ऐसे स्टूडेंट्स को ग्रूम करने की जरूरत है। उनके साथ के साथ ज्यादातर स्टूडेंट्स को जॉब मिली थी, संतोष भी नोएडा की एक आईटी फर्म में कार्यत हैं। वहीं 2015 बैच की एकेटीयू (सीएस-ट्रेड) टॉपर प्रतीक्षा वार्ष्णेय कहती हैं कि यह बात काफी हद तक ठीक है कि आधे से ज्यादा इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स केवल भेड़-चाल में पड़कर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हैं। इंजीनियर बनने के प्रति उनका लक्ष्य क्लीयर नहीं होता।

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पैरंट्स का प्रेशर भी रहता है

करियर काउंसलर राजेश चंद्र पांडे का कहना है कि इन हालातों के लिए स्टूडेंट्स को पूरी तरह से दोषी ठहराना ठीक नहीं। कई पैरंट्स अपने बच्चे को इंजीनियर ही बनाना चाहते हैं इसलिए वे उसका एडमिशन इंजीनियरिंग कॉलेज में करवा देते हैं। कई बच्चे भी केवल पैरंट्स की इच्छा पूरी करने के लिए बीटेक करते हैं। ऐसे में वे एक सफल इंजीनियर नहीं बन पाते तो इसके कई कारण हैं।

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