Murder of birds- यहां गजब खेल हो गया, बबलू और बल्लू के पेंच में पक्षियों का हत्यारा ऐश कर रहा

वनविभाग जिस ठेकेदार को तलाश रहा है, वह निगम उद्यान विभाग में अधिकारियों से गलबहियां किए घूम रहा

Forest department is looking to contractor, he is roaming around with officials in the Corporation Horticulture Department.

जबलपुर। एक नाम में हल्का से फेरबदल कितना असरकारक होता है, इसका उदाहरण जबलपुर शहर में देखा जा सकता है। यहां के जिला महाप्रबंधक दूरसंचार कार्यालय परिसर सीटीओ कम्पाउंड में पेड़ों की कटाई-छंटाई के दौरान सैकड़ों पक्षियों की जान चली गई थी। इन पक्षियों की जान लेने के आरोप में वन विभाग बबलू नाम के व्यक्ति को तलाश रहा है। जबकि नगर निगम की ओर से बीएसएनएल कैम्पस में पेड़ों की छंटाई का ठेका मोहम्मद रफीक खान उर्फ 'बल्लूÓ को दिया गया था। वन विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि उन्हें निगम के उद्यान विभाग के अफसरों ने ठेकेदार का नाम बबलू बताया था। बल्लू इस गफलत का खूब फायदा उठा रहा है। वह खुलेआम निगम के उद्यान विभाग के दफ्तर में बैठा रहता है। वहां के अधिकारियों से सेटिंग करता है। उनके साथ गलबहियां किए घूमता है।
चौंकाने वाला खुलासा
पेड़ों की कटाई की अनुमति देने से पहले नगर निगम के उद्यान विभाग की ओर से स्थल का निरीक्षण किया जाता है। बीएसएनएल कैम्पस के पेड़ों की छंटाई करने से पहले उद्यान विभाग के क्लर्क अमितकांत दुबे ने पांच बार निरीक्षण करने के बाद ठेकेदार बल्लू खान को छंटाई की अनुमति दी थी। फिर भी ठेकेदार को वहां के पेड़ों पर पक्षियों के सैकड़ों घोसले नजर नहीं आए। देखते ही देखते सैकड़ों पक्षी तड़प-तड़पकर मर गए थे।

इस बारे में नगर निगम के उद्यान अधिकारी अनिल मिश्रा का कहना है कि बीएसएनएल कैम्पस में पेड़ों की छंटाई का आवेदन मिलने पर अनुमति दी गई थी। उन्होंने भी माना कि ठेकेदार का नाम मोहम्मद रफीक उर्फ बल्लू है। यह भी माना कि वन विभाग बबलू नामक के व्यक्ति को तलाश रहा है। वहीं, रेंजर और जांच अधिकारी एमएल बरकड़े का कहना है कि उद्यान विभाग की ओर से जो चि_ी भेजी गई थी, उसमें ठेकेदार का नाम बबलू खान बताया गया है। निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से इस सम्बंध में पूछताछ करेंगे। अफसर कुछ भी कहीं। लेकिन, इस मामले में नाम की गफलत तो हुई है। यह भी साफ है कि नाम में गफलत अपने आप तो नहीं हुई। उसके पीछे साजिश किसकी है, इसकी जांच भी विभागों के इन्हीं अफसरों को करनी है। इसलिए बहुत कुछ साफ हो पाएगा, इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा

shyam bihari
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