यहां कट गए हैं 24 हजार वोटरों के नाम

यहां कट गए हैं 24 हजार वोटरों के नाम
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Gyani Prasad | Publish: Apr, 11 2019 12:04:02 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

केंट में सिविल एरिया विस्तार नहीं होने से समस्या, निवासियों का माना है अतिक्रमणकारी

 

 

फैक्ट फाइल
- 1826 में ब्रिटिशों ने किया केंट का गठन।
- शुरूआत से करीब 76 एकड़ सिविल एरिया।
- 1956 में पहली बार 29 एकड़ एरिया विस्तार।
- उस समय केंट की आबादी करीब 20 हजार।
- वर्तमान में आठ वार्डों में एक लाख से ज्यादा संख्या।
- दो साल पहले करीब 40 हजार 840 मतदाता।
- 24 हजार नाम कटे, फिर 16 हजार 650 मतदाता बचे।

जबलपुर@ज्ञानी रजक l केंट बोर्ड की मतदाता सूची से करीब 24 हजार लोगों के नाम कटने का दर्द आज भी यहां के लोगों सताता है। बगीचा, बंगला और बाजार क्षेत्र से बाहर की भूमि पर रहने वाले इप लोगों को बोर्ड ने अतिक्रमणकारी माना था। यह लोग लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में तो वोटिंग कर सकते हैं लेकिन केंट बोर्ड के पार्षद चुनने का अधिकार उनके पास नहीं है। लोग इसका कारण सिविल एरिया नहीं बढऩे को मानते हैं। यह मात्र 105 एकड़ है। बांकी जगह रक्षा संपदा विभाग या आर्मी की है। लोग कहते हैं कि सिविल एरिया का विस्तार हो जाए तो उनकी बड़ी चिंता दूर हो जाए।

सिविल एरिया में रहने वाली सुनीता रैकवार कहती हैं कि वर्षों बीत गए। हम सिविल एरिया विस्तार के लिए कह रहे हैं। परिवार बढ़ रहे हैं लेकिन आसपास जगह नहीं होने से उनके परिजनों को यहां से शिफ्ट होकर दूसरी जगह जाना पड़ा। यदि मौजूदा घर का दायरा बढ़ाएं तो केंट से कई प्रकार की अनुमति लेनी पड़ती है, वह आसानी से नहीं मिलती। बगीचा निवासी ममता जेठवानी कहती हैं कि कभी रक्षा संपदा विभाग तो कभी आर्मी आकर धमकी देती रहती है। नाली या नहानी का निर्माण किया तो उसे तोड़ दिया जाता है। यदि सिविल एरिया विस्तार होता है तो सारे बगीचा इसमें शामिल हो सकते हैं।

टेंट लगाओं तो आ जाती है सेना

सदर निवासी बोधराज और दीपू रैकवार ने अपनी पीड़ा बताई कि बगीचा क्षेत्र में रहते वाले लोग यदि टेंट भी लगाते हैं तो उस पर आपत्ति हो जाती है। इस बात सांसद और विधायक को अवगत करवा दिया है, लेकिन समस्या जस की तस है। ज्योति सुमन, सुनीता रैकवार, चमनलाल कनौजिया और ज्योति सुमन का कहना है कि बगीचा क्षेत्र में रहना जैसे अपराध हो गया है। सडक़ और नाली का निर्माण मुश्किल होता है। पानी भी मुश्किल से मिलता है। इसलिए यहां जनप्रतिनिधि वोट मांगने आएं तो इस समस्या का समाधन भी उन्हें करना चाहिए।

क्या है मामला

केंट में सिविल एरिया के विस्तार की जरुरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। केंट बोर्ड के पार्षदों ने कई बार इसकी पहल की। इसमें उनका कहना था कि सैन्य प्रयोजन के लिए राज्य शासन ने लगभग 323 एकड़ भूमि लीज पर दी थी। इस जमीन के बदले 157 एकड़ भूमि जो कि लगभग 100 किसानों को कृषि लीज पर सन 1930 या उसके पूर्व दी गई थी, उस भूमि को सैन्य प्रशासन और रक्षा संपदा विभाग अदला-बदली कर केंट प्रशासन को सौंप दे। इस जमीन पर सिविल एरिया का विस्तार किया जा सके। सांसद और राज्यसभा सदस्य के अलावा विधायकों ने शासन-प्रशासन के सामने विषय को उठाया लेकिन समाधान अब तक नही हो सका।

 

यह समस्याए
- घर का विस्तार करना होता है मुश्किल।
- केंट बोर्ड से आसानी से नहीं मिलती अनुमति।
- बुनियादी सुविधाओं के लिए जगह का अभाव।
- परिवार बढ़ता है तो सदस्यों को रहने की दिक्कत।
- लोग बगीचा और बंगला क्षेत्र की जमीन में शिफ्ट।
- इन जगहों पर लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं।

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