ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई टली

राज्य सरकार व हाईकोर्ट की ओर से मांगा गया समय

 

जबलपुर . ओबीसी आरक्षण बढ़ाने, ईडब्ल्यूएस आरक्षण में ओबीसी, एससी, एसटी को वंचित रखने और मप्र हाईकोर्ट की नियुक्तियों में बढ़ा हुआ ओबीसी आरक्षण न लागू करने को अलग-अलग याचिकाओं के जरिए दी गई चुनौती पर सोमवार को सुनवाई टल गई। चीफ जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच से राज्य सरकार व हाईकोर्ट की ओर से समय मांगा गया, जो दे दिया गया। अब 28 जनवरी को सुनवाई होगी।
यह है मामला

प्रत्यूष द्विवेदी, यूथ फॉर इक्वेलिटी संस्था, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे की ओर से याचिकाएं दायर कर कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले में दिए गए दिशानिर्देश के तहत किसी भी स्थिति में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। मध्यप्रदेश में पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत 20 प्रतिशत एसटी, 16 प्रतिशत एससी और 14 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण का प्रावधान था। राज्य सरकार ने 8 मार्च 2019 को एक अध्यादेश के जरिए इसे बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया। इसे १६ अगस्त २०१९ को कानूनी जामा पहना दिया गया।

450 पदों में 27 फीसदी किए आरक्षित
एक अन्य याचिका में कहा गया कि एमपीपीएससी ने 14 नवंबर को 450 शासकीय पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ की । कानून में संशोधन लागू कर इस प्रक्रिया में 27 प्रतिशत पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर लिए गए। अधिवक्ता आदित्य संघी, दिनेश उपाध्याय, सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने तर्क दिया कि इसके चलते शासकीय नौकरियों में आरक्षण की कुल सीमा बढकऱ 63 प्रतिशत हो गई है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ( ईडब्ल्यूएस) को दिए जा रहे १० फीसदी आरक्षण से एससी, एसटी व ओबीसी को वंचित रखे जाने व मप्र हाईकोर्ट की नियुक्तियों में बढ़ा हुआ ओबीसी आरक्षण न लागू करने के खिलाफ भी याचिकाएं दायर की गई हैं। सभी 11 याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी।

prashant gadgil Desk
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