सरकार ने की थी 3 नए कॉलेजों की घोषणा, एक भी शुरू नहीं हो पाया, यह है वजह

सरकार ने की थी 3 नए कॉलेजों की घोषणा, एक भी शुरू नहीं हो पाया, यह है वजह
Higher Education

Reetesh Pyasi | Updated: 04 Jul 2019, 10:00:00 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

इस सत्र भी कोरी साबित हो रही घोषणा

 

जबलपुर। जिले में तीन नए कॉलेजों के शुरू होने का सपना इस शिक्षण सत्र में पूरा होता नजर नहीं आ रहा। शासन और उच्च शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते नए कॉलेजों को शुरू करने के लिए जमीनी स्तर पर अब तक कोई पहल नहीं की गई है। कॉलेजों के लिए न ही जगह का चयन किया गया है और न ही बजट का प्रावधान किया गया है। शासन ने जबलपुर में विजय नगर, शहपुरा और चरगवां में तीन नए शासकीय कॉलेज खोलने की घोषणा की है। विजय नगर में महिला कॉलेज खोला जाना है। इसके लिए क्षेत्रीय विधायक ने दो-तीन स्थल बताए हैं, लेकिन प्रशासन इस पर निर्णय नहीं ले सका है। जानकारों के अनुसार शहर में तीन नए शासकीय कॉलेज खुलने से करीब दो हजार छात्र-छात्राओं को फायदा मिलेगा। भूमि एवं कॉलेज भवन को लेकर राशि का आवंटन नहीं होने से इस शिक्षण सत्र में नए कॉलेजों के शुरू हो पाना सम्भव नहीं है। क्योंकि, बजट के साथ शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है।

स्कूल भवन में हो सकती है शुरुआत-
जानकारों का कहना है कि यदि शासन इच्छाशक्ति दिखाए तो इसी सत्र से कॉलेजों की वैकल्पिक शुरुआत हो सकती है। जो भी नए कॉलेज खोले गए हैं, उनके पास खुद की जगह नहीं थी। कॉलेजों की शुरुआत या तो किराए के भवन से हुई या स्कूल भवनों से। शासकीय कॉलेज मझौली और बरेला स्थित कॉलेज की शुरुआत भी स्कूल भवन में हुई। बाद में कॉलेजों के खुद के भवन तैयार हुए।

तीन गल्र्स कॉलेज-
शहर में महज तीन शासकीय गल्र्स कॉलेज मानकुंवर बाई महिला कॉलेज, होम साइंस कॉलेज और रांझी में गल्र्स कॉलेज है। कॉलेजों में सीमित सीटें होने के कारण भी छात्राओं को निजी कॉलेजों में प्रवेश लेना पड़ता है।

कॉलेजों के लिए जिला प्रशासन को जमीन चिह्नित करना है। अभी तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। विजय नगर में कॉलेज खोलने के लिए तीन स्थान बताए हैं, इस पर प्रशासन को निर्णय लेना है।
विनय सक्सेना, विधायक, उत्तर-मध्य विधानसभा
शहर में प्रस्तावित तीन नए कॉलेजों के लिए अभी तक शासन स्तर पर कोई दिशानिर्देश नहीं मिले हैं। कॉलेज कब खुलेंगे, इस सम्बंध में कुछ भी कह पाना सम्भव नहीं है।
डॉ. लीला भलावी, प्रभारी अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा

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