
Minister Lakhan Ghanghoria
जबलपुर/ मप्र हाइकोर्ट ने गुरुवार को शहर की पहाडिय़ों के अतिक्रमण व अवैध निर्माण हटाने के मसले पर सुनवाई करते हुए सामाजिक न्याय मंत्री लखन घनघोरिया को चेतावनी दी कि दोबारा कोर्ट की अवमाननाजनक बयानबाजी की गई, तो पुन: संज्ञान लिया जाएगा। एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा व जस्टिस वीके शुक्ला की युगल पीठ ने मंत्री को कहा कि वे माफी मांगने की सभा का वीडियो भी यू ट्यूब पर अपलोड करें। कोर्ट ने शहर की सभी पहाडिय़ों को अतिक्रमण व अवैध निर्माणों से मुक्त कराने के लिए भी विस्तृत निर्देश दिए।
- दोबारा की गुस्ताखी तो होगी सख्त अवमानना की कार्रवाई, हाइकोर्ट ने मंत्री लखन घनघोरिया को दी चेतावनी
- मंत्री घनघोरिया ने बिना शर्त मांगी माफी
- कोर्ट ने दोबारा की गई आमसभा में माफी मांगने का वीडियो यू ट्यूब पर अपलोड करने को कहा
यह है मामला-
किशोरीलाल भलावी, नागरिक उपभोक्ता मंच व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में मदनमहल सहित शहर की सभी पहाडिय़ों से अतिक्रमण, अवैध निर्माण हटाने के निर्देश देने का आग्रह किया। कोर्ट ने गत सुनवाइयों में पहाडिय़ों से अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार व सख्त निर्देश दिए। इसी को लेकर 15 सितंबर को एक आमसभा में सिद्धबाबा इलाके की पहाड़ी के बाशिंदों को सामाजिक न्याय मंत्री लखन घनघोरिया ने सम्बोधित किया। अधिवक्ता श्रेयस पण्डित व आदित्य नारायण शुक्ला ने मंत्री लखन घनघोरिया पर आमसभा में जनता को भडक़ाने व कोर्ट की अवमाननाकारक टिप्पणियां करने का आरोप लगाते हुए मंत्री पर इसके लिए अदालत की अवमानना की कार्रवाई करने का आग्रह किया। गत सुनवाई में कोर्ट ने मंत्री घनघोरिया का माफीनामा नामंजूर कर उन्हें आमसभा कर माफी मांगने की सलाह दी थी। कोर्ट ने उन्हें ऐसा करने के बाद रिपोर्ट पेश करने को कहा था।
सरकार से कहें क्या सारे अधिकार दे दे-
गुरुवार को मंत्री की ओर से कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा गया कि एक अक्टूबर को उसी सिद्धबाबा इलाके में सभा कर घनघोरिया ने जनता से कोर्ट के आदेश का सम्मान और पालन करने को कहा। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग पेश की गई। कोर्ट ने कहा कि उक्त पूरे बयान में मंत्री ने ये नहीं कहा कि वे मंत्री होने के नाते कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या सरकार से मंत्री को सारे अधिकार दे देने को कहा जाए?
सभी पहाडिय़ों के लिए निर्देश, भ्रम क्यों-
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि पहाडिय़ों से अवैध निर्माण हटाने, उन्हें पूर्व रूप में लाने और संरक्षण की कार्रवाई लगातार जारी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कार्रवाई में भेदभाव, लापरवाही व राजनीतिक दखलंदाजी का आरोप लगाया गया। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि बाकी सभी पहाडिय़ों का सर्वे एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाए। अवैध निर्माण हटाना जारी रखा जाए। हर कार्रवाई के दौरान पर्याप्त और आवश्यक रूप से पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। मदनमहल पहाड़ी के खसरा 407/1 से एक अवैध निर्माण सहित दो धार्मिक स्थलों के इर्दगिर्द से अवैध निर्माण हटाये जाएं। अन्य कई अवैध निर्माण भी हटाने के निर्देश दिए गए।
Published on:
04 Oct 2019 10:38 am
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