लोकसभा चुनाव से पहले हाईकोर्ट के वकीलों ने उठाई ये बड़ी मांग

लोकसभा चुनाव से पहले हाईकोर्ट के वकीलों ने उठाई ये बड़ी मांग

Abhishek Dixit | Publish: Apr, 17 2019 11:52:18 AM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 11:52:19 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

मप्र हाईकोर्ट के वकील बोले, प्रोटेक्शन एक्ट का वादा साबित हुआ छलावा, पेंशन की मांग भी है अनसुनी

जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट के वकीलों ने कहा कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल बरसों से उन्हें राज्य में एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने का सपना दिखा रहे हैं। लेकिन, यह छलावा साबित हुआ है। वकीलों ने कहा कि वे अपना पूरा जीवन न्यायिक सेवा में दे देते हैं, लिहाजा उन्हें एक उम्र के बाद पेंशन भी मिलनी चाहिए। इसके अलावा भी अपनी अन्य समस्याओं पर पत्रिका से चर्चा के दौरान वकील मुखर हुए। जबलपुर में बारह हजार से अधिक अधिवक्ता विभिन्न न्यायिक संस्थानों में पैरवी करते हैं।

सिहोरा कोर्ट में बिल्डिंग नहीं
सिहोरा तहसील कोर्ट की बिल्डिंग न होने की समस्या पर भी वकील आक्रोशित नजर आए। अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा कि सिहोरा कोर्ट में वकीलों, पक्षकारों के बैठने की जगह नहीं है। जीर्णशीर्ण भवन में अदालत लग रही है। उन्होंने कहा कि बरसात में छत से टपकते पानी के बीच मामलों की सुनवाई होती है।

डेथ क्लेम की राशि भी कम
अधिवक्ता राकेश तिवारी का कहना था कि वकीलों की मृत्यु उपरांत उनके परिजन को मिलने वाली मृत्युदावा राशि डेढ़ लाख रु पए है। इस पर भी राज्य सरकार अपना हिस्सा समय पर नहीं देती। इसके चलते दिवंगत वकीलों के परिजन को भटकना पड़ता है। चर्चा में अधिवक्ता विनोद फौजदार, दीपेंद्र श्रीवास्तव, संजीव पचौरी, धमेंद्र पांडे, अजय व्यास उपस्थित थे।

कोई नहीं सुनता वकीलों की बात, पेंशन नहीं मिल पाई
अधिवक्ता सतीश ठाकुर ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल वकीलों की ओर ध्यान नहीं देता। केवल चुनाव के वक्त उनकी याद आती है। उन्होंने कहा कि किसी भी दल के घोषणापत्र में वकीलों के लिए कोई घोषणा नहीं है। जीवन भर न्यायदान प्रक्रिया में सहयोग देने वाले वकीलों को भी रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलनी चाहिए। यह घोषण किसी राजनेता ने नहीं की। उन्होंने कहा कि यह मसला वकीलों के लिए लोकसभा चुनाव के दौरान अहम होगा।

कोई नहीं सुनता वकीलों की बात, पेंशन नहीं मिल पाई
अधिवक्ता सतीश ठाकुर ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल वकीलों की ओर ध्यान नहीं देता। केवल चुनाव के वक्त उनकी याद आती है। उन्होंने कहा कि किसी भी दल के घोषणापत्र में वकीलों के लिए कोई घोषणा नहीं है। जीवन भर न्यायदान प्रक्रिया में सहयोग देने वाले वकीलों को भी रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलनी चाहिए। यह घोषण किसी राजनेता ने नहीं की। उन्होंने कहा कि यह मसला वकीलों के लिए लोकसभा चुनाव के दौरान अहम होगा। मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव मनीष तिवारी ने कहा कि 2012 में मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने निवास पर प्रदेश भर के वकीलों की महापंचायत बुलाई थी। इस दौरान उन्होंने वकीलों से वादा किया था कि जल्द ही वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट राज्य में लागू किया जाएगा। इसके बाद कांग्रेस की वर्तमान सरकार ने भी चुनाव के पूर्व यह एक्ट लागू करने का आश्वासन दिया। लेकिन, अब तक इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। उन्होंने कहा कि इस मसले पर दोनों दल वकीलों को अधर में लटकाए हुए हैं। इस चुनाव में वकील इस विषय को मुद्दा बनाएंगे।

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