उपचुनावों से ठीक पहले, MP में PM के ड्रीम प्रोजेक्ट में करोड़ों का घोटाला

-MP के एक दो नहीं चार जिलों में हुआ एक साथ घोटाला

By: Ajay Chaturvedi

Published: 24 Sep 2020, 01:39 PM IST

जबलपुर. MP में PM के ड्रीम प्रोजेक्ट में करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ है। यह कब से चल रहा था और इसकी भरपाई कौन और किससे करेगा इस पर मंथन शुरू हो गया है। वैसे इस महा घोटाले ने उप चुनावों के मद्देनजर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को भरपूर मौका दे दिया है। अब शुरू होगा खेल।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक सौभाग्य योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में 29 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला सामने आया है। इतने बड़े घोटाले के सामने आने के बाद से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ये दीगर है कि अभी न सत्ता पक्ष से कोई कमेंट सामने आया है न विपक्ष की ओर से लेकिन राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह घोटाला बड़ा गुल खिला सकता है।

'सौभाग्य योजना' के तहत केंद्र सरकार के हर घर को रोशन करने की योजना में प्रदेश के चार जिले में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार पकड़ में आया है। शिकायतों के आधार पर बिजली कंपनी ने चार जिलों की जांच कराई तो 29 करोड़ रुपये से ज्यादे के घोटाला का पर्दाफाश हुआ है। पूर्व क्षेत्र कंपनी को भौतिक जांच में इसके प्रमाण मिले हैं। सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार मंडला और डिंडौरी जिले में हुआ। मंडला में जहां 15 करोड़ रुपये तो डिंडौरी जिले में 8.40 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार मिला है। इसके अलावा सीधी और सिंगरौली में इस योजना पर करोड़ों रुपये का खेल हुआ है। कंपनी ने फिलहाल सिंगरौली को छोड़कर शेष 44 अफसरों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। अक्टूबर तक कंपनी तय करेगी कि 29 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई किससे की जाएगी।

पीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत गरीब परिवारों के घरों को रोशन करना था। केंद्र सरकार ने 2017 में राज्यों को इस काम की जिम्मेदारी दी थी। जिन लोगों के नाम साल 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना में था, उन्हें मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जाना था और जिनका नाम सामाजिक आर्थिक जनगणना में नहीं हैं, उनसे 500 रुपये टोकन मनी लेकर कनेक्शन दिया जाना था। सरकार ने दिसंबर 2018 हर घर रोशन करने का लक्ष्य रखा था।

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की जांच रिपोर्ट में 6 करोड़ की वित्तीय अनियमितता और 9 करोड़ रुपये का बिना काम कराए अतिरिक्त भुगतान का मामला प्रकाश में आया है। यानी कुल 15 करोड़ रुपये का घोटाला। इसमें 18 अधिकारी-कर्मचारियों को 9 महीने पहले ही आरोप-पत्र दिए जा चुके हैं।

डिंडौरी की रिपोर्ट में 8.40 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार सामने आया है। कुल 24 हजार कनेक्शन में 11 हजार कनेक्शन की जांच भौतिक रूप से हुई है। जांच अभी जारी है। इसमें तत्तकालीन अधीक्षण यंत्री टीके मिश्रा समेत 9 अफसर जांच के दायरे में है।

सीधी में 2 करोड़ से ज्यादा का घोटाला अभी तक जांच में सामने आया। इसमें 659 प्रोजेक्ट में सिर्फ 218 की जांच में ही यह गड़बड़ी उजागर हुई है। इसमें भी 18 अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र फरवरी 2020 में जारी किया गया है।

सिंगरौली में 502 क्रय आदेश की जांच की। इसमें तीन ठेकेदारों को अफसरों ने 4.40 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि भुगतान कर दी। इसमें तत्कालीन कार्यपालन अभियंता अमित कुमार समेत तीन अफसर जांच के दायरे में है।

"मंडला, डिंडौरी, सीधी, सिंगरौली में सौभाग्य योजना की जांच हुई है। तीन जिले की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। इसमें दोषी अफसरों के खिलाफ आरोप-पत्र जारी किए गए हैं। इनकी जांच हो रही है। विभागीय जांच के नतीजों पर अफसरों से वसूली या अन्य कार्रवाई की जाएगी।" -कविता बाटला, मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

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