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यहां तो कमाल हो गया, एक ही दिन में निपटे कई दिन के काम

मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से सम्बद्ध नर्सिंग कॉलेज का मामला

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जबलपुर। मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध नर्सिंग कॉलेजों में मनमानी व्यवस्था का एक मामला उजागर हुआ है। इसमें भोपाल के एक नर्सिंग कॉलेज में एक ही दिन में एमएससी फस्र्ट और सेकेंड ईयर के विद्यार्थियों का प्रेक्टिकल एग्जाम और वायवा आयोजित किया गया। दोनों कक्षाओं को मिलाकर सात विषय की परीक्षा लेने के लिए एक ही शहर से चार प्रोफेसर को भेजा गया। परीक्षा के पैटर्न से विद्यार्थियों के मूल्यांकन की व्यवस्था संदिग्ध हो गई। मामले की खानापूर्ति की सुगबुगाहट हुई तो यूनिवर्सिटी तत्काल हरकत में आयी। मामले की जांच कराने के साथ ही इन प्रेक्टिकल और वायवा को लेकर नर्सिंग डीन और इंदौर के गर्वनमेंट कॉलेज की प्राचार्य जे. फिलिप से अभिमत मांगा है। अभिमत के आधार पर मामले में आगे कार्रवाई होगी।
शहर से गए थे ये टीचर
- मालती लोधी, रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग
- प्रिंसी सजी, जबलपुर इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग साइंस एंड रिसर्च
- सपना दास, जबलपुर इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग साइंस एंड रिसर्च
- लीला ठाकुर, अनुश्री कॉलेज ऑफ नर्सिंग
(नोट: ये सभी शिक्षक ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे नर्सिंग कॉलेज में 4 जून को प्रेक्टिकल और वायवा लिया।)
कॉलेज प्रबंधन संदेह के घेरे में
पीजी की तकरीबन सभी विषयों के प्रेक्टिकल परीक्षा और वायवा एक साथ कराने के निर्णय कॉलेज प्रबंधन की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। जानकारों का मानना है कि प्रेक्टिकल के एग्जाम के लिए एक्सटरनल बनाए गए सभी शिक्षक निर्धारित पात्रता रखते है, लेकिन एक ही विषय की तैयारी में छात्र-छात्राओं को काफी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में एक ही दिन चार विषय की प्रायोगिक परीक्षा से विद्यार्थी तनाव में आ सकते हैं।

प्रायोगिक परीक्षा का आयोजन कॉलेज और छात्र-छात्राओं की सुविधानुसार होता है। एक नर्सिंग कॉलेज में एक दिन में चार से अधिक विषय की परीक्षा कराने की जानकारी सामने आयी थी। सभी एग्जामनर विषय विशेषज्ञ है। मामले में डीन नर्सिंग से अभिमत मांगा गया है। फिर भी छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए एक साथ ज्यादा विषय की प्रायोगिक परीक्षा न कराएं यह कहा गया है।
- प्रो. आरएस शर्मा, कुलपति, मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय