नर्मदा नदी पर बने इस बड़े बांध की प्राइवेट फर्म के नाम हो गई रजिस्ट्री

बरगी बांध से संबंधित है मामला

By: deepankar roy

Updated: 06 Feb 2018, 11:33 AM IST

जबलपुर। आप प्लॉट और मकान जैसी संपत्तियों की रजिस्ट्री के संबंध में जानते होंगे। लेकिन जबलपुर जिले में एक सरकारी बांध की रजिस्ट्री प्राइवेट फर्म पर कर दी गई है। मामला नर्मदा नदी पर स्थित रानी अवंती बाई लोधी परियोजना से जुड़ा है। जिसके बांध की सोमवार को बकायदा ई-रजिस्ट्री हुई। बांध की रजिस्ट्री कराने वाले ने बकायदा सरकार को निर्धारित स्टांप शुल्क भी चुकाया। ये प्रदेश में संभवत: पहला मामला है जब किसी बांध की निजी फर्म के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई है।

मछुआरों के नाम पर पंजीयन
रानी अवंती बाई लोधी परियोजना के अंतर्गत जबलपुर, मण्डला एवं सिवनी जिलों में स्थित बरगी बांध में कई पंजीकृत मत्स्य सहकारी सहमितियां है। इन समितियों को मत्स्य आखेट के मप्र मत्स्य महासंघ (सह.) मर्यादित द्वारा बांध अनुबंध पर दिया जाता है। इस अनुबंध को आधार बनाकर ही बांध की रजिस्ट्री की गई है। इन मछुआ समूहों द्वारा आखेटित मत्स्य के विक्रय के लिए मप्र मत्स्य महासंघ (सह.) मर्यादित के क्षेत्रीय प्रबंधक और ठेका लेने वाली एक निजी फर्म के संचालक के बीच रजिस्ट्री हुई है।

ऐसा पहली बार
बांध की रजिस्ट्री में उसकी लंबाई-चौड़ाई, क्षेत्रफल जैसे हर कॉलम को सामान्य रजिस्ट्री की तरह भरा गया है। मछली पकडऩे के लिए बांध को कुछ वर्ष के अनुबंध पर प्रत्येक वर्ष निजी फर्म को अनुबंध पर दिया जाता है। लेकिन ये संभवत: पहली बार हुआ है जब ठेके पर मिले बांध की किसी ने रजिस्ट्री कराई है। वो भी बकायदा नए-नियमों के मुताबिक स्टाम्प शुल्क जमा करके ई-रजिस्ट्री कराई गई है।

6 वर्ष का अनुबंध
मप्र मत्स्य महासंघ द्वारा किए गए इस अनुबंध की अवधि 6 वर्ष की है। छिंदवाड़ा के मेसर्स केजीएन की ओर से हस्ताक्षर किए गए है। महासंघ के क्षेत्रीय प्रबंधक सीबी मोहने ने रजिस्ट्री की है। निजी फर्म ने रजिस्ट्री के दौरान करीब 3 लाख 63 हजार 113 रुपए स्टाम्प शुल्क और 2 लाख 72 हजार 335 रुपए का पंजीयन शुल्क चुकाया है। अनुबंध की समय-सीमा 3 फरवरी, 2018 से 15 जनू 2024 है।

6 लाख रुपए राजस्व मिला
मध्यप्रदेश पंजीयन विभाग में प्रभारी उप महानिरीक्षक प्रभाकर चतुर्वेदी के अनुसार बरगी डैम में मत्स्य आखेट के लिए महासंघ द्वारा दिए गए पट्ट्रे पर पहली बार किसी ने रजिस्ट्री करवाई है। लगभग 6 साल के लिए आवंटित पट्टे की ई-रजिस्ट्री होने पर शासन को करीब 6 लाख रुपए के राजस्व की प्राप्ति हुई है।

Show More
deepankar roy Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned