जब कोर्ट हुआ नाराज तो पति-पत्नि को दी ये अनोखी सजा

जब कोर्ट हुआ नाराज तो पति-पत्नि को दी ये अनोखी सजा

Mukesh Gaur | Publish: Mar, 01 2019 11:11:11 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

हाईकोर्ट ने कहा-बाल सुधारगृह में दिनभर बच्चों की करो सेवा, दो-दो पेड़ लगाओ, फिर करेंगे केस खत्म

राहुल मिश्रा . जबलपुर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आपसी विवाद में पुलिस से लेकर न्यायपालिका तक को बेवजह परेशान करने वाले पति-पत्नी को अनोखा सबक दिया है। जस्टिस जेके महेश्वरी की सिगल बेंच कोर्ट ने कहा कि 10 अपै्रल को पति-पत्नी एक पूरा दिन गोकलपुर रांझी स्थित बाल सुधारगृह जाकर बच्चों की सेवा करें। दोनों वहां दो-दो पौधे भी लगाएं, इसके बाद ही उनके मामले पर विचार किया जाएगा।


जबलपुर के मदनमहल थानांतर्गत नेपियर टाउन निवासी सीमा जायसवाल का विवाह मुंबई निवासी मनीष से हुआ था। पति-पत्नी में विवाद के चलते 29 मई 2014 को सीमा ने महिला थाना मदनमहल जबलपुर में मनीष, उसके पिता रमेश व परिजनों उमा, सुधा व ऊषा जायसवाल के खिलाफ भादंवि की धारा 498 ए, 506 बी व दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3(4) के तहत केस दर्ज करा दिया। बाद में केस चलने के दौरान पति-पत्नी में सुलह हो गई तो इस मामले को निरस्त करने के लिए पति व परिजनों ने हाईकोर्ट में यह अर्जी लगाई।


जताई नाराजगी
सुनवाई में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसका पत्नी सीमा से समझौता हो चुका है। अब दोनों साथ रह रहे हैं। लिहाजा यह मामला बेमकसद है। कोर्ट ने भादंवि की धारा 498 ए के प्रावधानों के तहत रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष दोनो पक्षों को समझौते की पुष्टि करने के निर्देश दिए। समझौते के बाद कोर्ट से याचिकाकर्ता की ओर से मामला खारिज करने का आग्रह किया गया। इस पर शासक ीय अधिवक्ता सोम मिश्रा ने आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि आपसी विवाद में पति-पत्नी ने सरकारी मशीनरी सहित न्यायालय को भी न केवल परेशान किया, बल्कि बेशकीमती समय भी खराब किया। कोर्ट ने कहा-आपसी विवाद में पहले तो पुलिस व निचली अदालत का कीमती समय बर्बाद किया गया। इसके बाद हाईकोर्ट के समक्ष भी केस दायर कर अतिमहत्वपूर्ण मामले लंबित रहने के बावजूद सुनवाई के लिए कोर्ट से आग्रह किया। यह छोटे-छोटे मामलों में न्यायपालिका का समय बर्बाद करने जैसा और अनुचित है।

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