तहसीलदार के तबादले के बाद बीपीएस में फिर छाए काले बादल, बाहरियों को मिल रहा दोहरा लाभ

तहसीलदार के तबादले के बाद बीपीएस में फिर छाए काले बादल, बाहरियों को मिल रहा दोहरा लाभ

Badal Dewangan | Publish: Aug, 12 2018 10:04:51 AM (IST) Jagdalpur, Chhattisgarh, India

स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को प्राथमिकता नहीं, बाहरियों को मिल रहा दोहरा लाभ

जगदलपुर. बस्तर के ट्रांसपोर्टरों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। 14 महीने बाद संघ कार्यालय का दरवाजा तो खुला लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण में संघ संचालन को लेकर काफी दिक्कतें आ रहीं है। दरअसल ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता नहीं मिल रही है। इसके चलते बाहरी ट्रांसपोर्टरों को दोहरा फायदा हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ इस व्यवस्था के चलते स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का नंबर भी देर से आ रहा है और बाहरी शहरों में प्राथमिकता नहीं मिलने से उन्हें माल के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ रहा है।

संघ के लोगों का कहना है कि बस्तर में लौह अयस्क पर अधिकतर गाडि़यां निर्भर है। इसलिए बाहर की गाडि़यां जब यहां आती हैं तो उन्हें माल खाली करने के बाद बिना किसी अनुमति लिए सीधे लौह अयस्क के साइडिंग पहुंच जाती हैं, एेसे में स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को माल नहीं मिल पाता या मिलता भी तो काफी दिन बाद। वहीं बाहरी गाडि़यां माल लेकर स्थानीय गैरेज या अन्य जगह माल छोड़ती हैं और सीधे बिना किसी से अनुमति लिए सीधे साइट पर पहुंचकर तुरंत माल भर लेती हैं। लेकिन जब यहां के लोग माल लेकर बाहर जाते हैं तो वहां स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को प्राथमिकता के बाद उन्हें माल दिया जात है। एेसे में बस्तर के ट्रांसपोर्टरों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

95 प्रतिशत गाडि़यां लौह अयस्क परिवहन पर है निर्भर
गौरतलब है कि बस्तर में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में लगी ट्रकों का 95 प्रतिशत काम लौह अयस्क परिवहन पर निर्भर है। लौह अयस्क परिवहन व्यवथित तरीके से हो इसके लिए बस्तर परिवहन संघ की नींव रखी गई थी। करीब 60 साल तक बिना किसी विवाद के यह लगातार संचालित भी होता रहा, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप की आंच इसपर भी आई और इसके चलते 14 महीने तक इस पर ताला जड़ दिया गया।

थोड़ी राहत मिली, थोड़े और की जरूरत है
14 महीने बाद संघ का ताला खुलने से ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने राहत की सांस तो जरूर ली है। लेकिन उन्हें कुछ और राहत की जरूरत है। संघ का कहना है कि किसी राजपत्रित अधिकारी के अधीन संघ के कुछ सदस्यों की एक समिति इसके कार्य का संचालन करें तो ज्यादा बेहतर है। वहीं उन्होंने कहा कि संचालन की पूरी निगरानी राजपत्रित अधिकारी करें इसमें उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को माल ढुलई के लिए प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

मिलेंगे कलक्टर से, रखेंगे प्रस्ताव
संघ के सदस्यों का कहना है कि तहसीलदार आरपी बघेल के स्थानांतरण के बाद संघ के संचालन में दिक्कत आ सकती है इसलिए संघ के सदस्यों की 10 सदस्यीय टीम संघ का संचालन प्रशासनिक अधिकारी की निगरानी में करेंगे, यह प्रस्ताव कलक्टर अय्याज तंबोली के सामने रखी जाएगी, ताकि ट्रांसपोर्टरों का नुकसान न हों।

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