World Herritage 2021: करोड़ों वर्ष पुरानी है कुटुमसर गुफा, इसके अंदर छिपे हैं कई रहस्य

World Heritage Day 2021: करोड़ों वर्ष पुरानी कुटुमसर गुफा (Kutumsar Caves) बस्तर आने वालों के लिए बहुत ही रोचक है। कांगेर घाटी (Kanger Ghati) में स्थित इस गुफा का मुख्य आकर्षण इसके अंदर की बनावट है।

By: Ashish Gupta

Updated: 18 Apr 2021, 04:36 PM IST

बस्तर. छत्तीसगढ़ का बस्तर अपने आप में बहुत से रहस्यों और प्राकृतिक सुंदरता को समेटे हुए है। बस्तर और उसके आसपास अनेक ऐसी जगह है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। करोड़ों वर्ष पुरानी कुटुमसर गुफा (Kutumsar Caves) बस्तर आने वालों के लिए बहुत ही रोचक है। कांगेर घाटी (Kanger Ghati) में स्थित इस गुफा का मुख्य आकर्षण इसके अंदर की बनावट है।

गुफा के भीतर बनी है चूना पत्थर से सुंदर आकृतियां

इस गुफा के अंदर चूना पत्थर से बनी स्टेक्टेलाइट व स्टेलेग्माईट आकृतियां है। इस गुफा में गहरा अंधेरा रहता है। जैसे ही इन आकृतियों पर सूरज की किरणें पड़ती तो ये सारी आकृतियां झूम उठती है। यहां की चूना पत्थर से बनी विभिन्न आकृतियां लोगों का मन मोह लेती है। इन आकृतियों में आप जितनी चाहे उतनी आकृतियां ढूंढ सकते हैं। इस गुफा की सबसे खास बात यह है कि यहां जो स्तंभ बने हैं, वह प्राकृतिक रूप से बनी हुई है।

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कुटुमसर का इतिहास
कुटुमसर की गुफाएं भारत की सबसे गहरी गुफा मानी जाती है। यह गुफा की जमीन से गहराई 60 से 120 फ़ीट तक है। यह गुफा 4500 फ़ीट लम्बी है। इस गुफा की खोज प्रोफेसर शंकर तिवारी ने की थी। एक अध्ययन से पता चला है कि करोड़ों वर्ष पूर्व प्रागैतिहासिक काल में बस्तर की कुटुमसर की गुफाओं में मनुष्य रहा करते थे। चूना पत्थर से बनी कुटुमसर की गुफाओं के आंतरिक और बाह्य रचना के अध्ययन के बाद शोधकर्ता कई निष्कर्षों पर पहुंचे हैं।

आकाशवाणी केंद्र ने इन पत्थरों को बनाया वाद्य यंत्र
माना जाता इस गुफा में पानी के साथ जो कैल्शियम गिरता था, वह जमते हुए सुंदर आकृतियों और स्तम्भों का रूप में परिवर्तित हो गया। इस रहसयमयी गुफा में आकाशवाणी केंद्र ने यहां के पत्थरों को वाद्य यंत्र की तरह उपयोग करते हुए विभिन्न तरह के स्वर निकाले थे।

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गुफा में हैं अंधी मछलियां
पानी से घिरी हुई यह अंधेरी कुटुमसर गुफा, जहां अंधी मछलियां रहती है। यह गुफाएं बहुत पुरानी बनी है और अंधी मछलियों के लिए मशहूर है। जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती जिसके कारण यहां आने वाला व्यक्ति पूरी तरह अंधा महसूस करता है। जिसके कारण यहां कि मछलियों की आखों पर एक पतली सी झिल्ली चढ़ चुकी है, जिससे वे पूरी तरह अंधी हो गई हैं।

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