एसएमएस के ट्रोमा में शुरू होगा वर्ल्ड क्लास आइसीयू, घायलों को मिल सकेगा तुरन्त बेहतर इलाज

सवाई मानसिंह अस्पताल में मरीजों के बढ़ते दबाव को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार, 9 करोड़ 80 लाख रुपए की लागत से तैयार होगा आइसीयू, परिवहन विभाग के रोड सेफ्टी सेल से बजट हुआ सेंशन, दो महीने में एडवांस आइसीयू बनकर हो जाएगा तैयार

अविनाश बाकोलिया / जयपुर. सवाई मानसिंह अस्पताल में मरीजों के बढ़ते दबाव को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सबसे ज्यादा समस्या दुर्घटना के दौरान मरीज को आइसीयू नहीं मिल पाने की रहती है। इस वजह से कई बार मरीज की जान चली जाती है। अब ट्रोमा सेंटर में आइसीयू की समस्या से छुटकारा मिल सकेगा। ट्रोमा सेंटर की तीसरी मंजिल पर वल्र्ड क्लास आइसीयू तैयार किया जा रहा है। इसके लिए परिवहन विभाग के रोड सेफ्टी सेल के अंतर्गत एसएमएस अस्पताल को 9 करोड़ 80 लाख रुपए सेंशन हुए हैं।


अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार आने वाले दो महीने में एडवांस आइसीयू बनकर तैयार हो जाएगा। मशीनों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एक-डेढ़ महीने में सारी मशीनें आ जाएंगी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. डी.एस. मीणा ने बताया कि इसमें किडनी के मरीजों की डायलीसिस की अलग से व्यवस्था होगी। साथ ही कई बार दुर्घटना के दौरान एचआइवी के मरीज भी आ जाते हैं। ऐसे मरीजों को सेगरीगेट करके अलग से रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा छोटे बच्चों के लिए अलग से वेंटीलेटर होगा।

18 बैड का बनेगा आइसीयू
अस्पताल प्रशासन के अनुसार वर्तमान में अस्पताल के आइसीयू में 292 बैड है। वल्र्ड क्लास आइसीयू 18 बैड का होगा। वर्तमान में ट्रोमा में दुर्घटना से घायल होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। दुर्घटना में घायल होने वाले अधिकांश युवा होते हैं। ऐसे में आइसीयू में बैड नहीं मिलने से युवाओं की मौत हो जाती है। नया आइसीयू बनने से बैड की कमी नहीं रहेगी।

स्किल लैब में घायलों को बचाने की मिलेगी ट्रेनिंग
ट्रोमा सेंटर के ग्राउंड फ्लोर पर 4 करोड़ 89 लाख रुपए की लागत से स्किल लैब तैयार की जा रही है। इसमें डॉक्टर, नर्स, स्टूडेंट्स और ढाबे वालों को ट्रेनिंग दी जाएगी कि यदि आपके सामने दुर्घटना हो जाती है, तो किस तरह से अस्पताल लाएं। अस्पताल लाने के बाद कैसे ट्रीट किया जाएगा। इसके लिए लैब में मॉडल्स लगाए जाएंगे। लैब में कम्प्यूटर्स पर दुर्घटना का लाइव सीन क्रिएट कर घायल मरीज को बचाने के ट्रेनिंग दी जाएगी। राजस्थान का पहला स्किल लैब होगा।

pushpendra shekhawat Desk
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