राठौड़ का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र, केंद्र सरकार के अध्यादेश को लागू करने की मांग

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कृषक उपज व्यापार और वाणिज्यक (सवंर्द्धन और सरलीकरण) अध्यादेश 2020 को लेकर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करने की मांग की है।

By: Umesh Sharma

Published: 07 Sep 2020, 04:58 PM IST

जयपुर।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कृषक उपज व्यापार और वाणिज्यक (सवंर्द्धन और सरलीकरण) अध्यादेश 2020 को लेकर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करने की मांग की है।

राठौड़ ने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसानों को दशकों बाद पूरे देश में कहीं भी अपनी फसल को बेचने का अधिकार दिया है। लेकिन राज्य सरकार ने लगभग 3 महीने बीतने के बाद भी इसे लागू करने पर कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया। अध्यादेश की मूल भावनाओं के विपरीत सरकार ने इसी 24 जुलाई को विधानसभा में प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति में राजस्थान कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक 2020 पारित करवा दिया। इससे सिद्ध हो गया कि सरकार किसान को केन्द्र सरकार द्वारा बिना टैक्स, बिना फीस या सैस से अपनी फसल को देश में कहीं भी बेचान करने के वैधानिक अधिकार को लागू नहीं करना चाहती।

राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हाल ही में कृषि उपज मण्डी अधिनियम में किये गये दोनों संशोधन केन्द्र सरकार द्वारा जारी अध्यादेश की मूल भावना के विपरीत हैं। आज राजस्थान देश में सर्वाधिक 2.6 प्रतिशत मण्डी टैक्स राज्य के किसानों से वसूल रहा है। वहीं हमारे पड़ोसी राज्यों में हरियाणा में 1% , गुजरात में .5%, मध्यप्रदेश में 1%, महाराष्ट्र में .80% व कर्नाटक में .35% मण्डी टेक्स की दरें है। सरकार की ओर से किया गया संशोधन संघवाद की अवधारणा पर सीधी चोट है।

सरकार कम करे टैक्स

राठौड़ ने गहलोत से मांग की है कि राज्य सरकार कृषि उपज पर सभी करों, फीस व सेस को तुरंत प्रभाव से वापस ले ताकि राज्य का व्यापारी उन्मुक्त हो और किसानों की फसल का क्रय—विक्रय कर सके। उन्होंने सुझाव दिया है कि अगर सरकार उचित समझे तो एपीएमसी यार्ड को व्यवस्थित करने के लिए मेन्टीनेंस चार्ज के रूप में मात्र 0.50 (50 पैसा प्रति सैंकड़ा) की राशि मात्र वसूल करने का प्रावधान कर सकती है।

Umesh Sharma Reporting
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