फिट न होने का संकेत है सांस फूलने की दिक्कत

फिट न होने का संकेत है सांस फूलने की दिक्कत

Divya Sharma | Publish: Jul, 26 2019 02:39:14 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

अक्सर बच्चों से लेकर बड़ों सभी को किसी न किसी कारण से सांस फूलने की शिकायत होती है। सांस फूलने के साथ यदि आए अधिक पसीना और सीने में हो भारीपन तो हो जाएं अलर्ट...

४५ से ६५ वर्ष की महिलाओं में सीओपीडी मुख्य कारण है सांस फूलने का
२० प्रतिशत ज्यादा प्रभावित होता है फेफड़ा सिगरेट और गाडिय़ों से निकले धुएं से

बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़ों सभी को सांस फूलने की समस्या किसी न किसी कारण से होती है। आमतौर पर व्यायाम करने के बाद या फिर किसी शारीरिक गतिविधि के बाद सांस फूलना सामान्य है। कई बार अधिक वजनी व्यक्ति को बिना किसी गतिविधि से भी सांस फूलती है। ऐसा उनके शारीरिक रूप से फिट न होने का संकेत हो सकता है। सांस फूलने की अन्य वजहें भी हैं। अधिक सांस फूलने के साथ सीने में भारीपन व पसीना आए तो अलर्ट हो जाएं।


सांसों पर नियंत्रण घटता
ऐसी समस्याएं जिनमें सबसे ज्यादा फेफड़ा प्रभावित होता है, इससे सांस पर नियंत्रण कम रहता है। जैसे अस्थमा, सीओपीडी, एम्फीसिमा, ब्रोंकाइटिस, ट्रेकिया में तकलीफ, फेफड़ों का ट्यूमर, बैक्टीरियल निमोनिया, अधिक धूम्रपान से ब्रोंकाइटिस, वायरल निमोनिया, आईएलडी, फेफड़ों का सिकुडऩा, निमोकोनियोसिस एवं एलर्जी, फेफड़ों में पानी भरना या हवा भर जाना, फेफड़ों में एम्बोलिज्म, सारकोडिसीस या कमजोरी आदि प्रमुख रूप से शमिल हैं।


हृदय रोग
हृदय की कार्यप्रणाली धीमी होने से भी सांस फूलने लगती है। लंबे समय से हाई बीपी, इस्कीमिक हार्ट डिजीज (आइएचडी), हार्ट के वॉल्व में खराबी, अल्कोहालिक कार्डियोमायोपैथी, इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथिक, हृदय की बाहरी परत पर पानी भरना (पेरिकार्डियल इंफ्यूजन), हार्ट ब्लॉक होने की स्थिति में भी सांस बाधित होती है।


डायबिटीज किटोएसिडोसिस
मधुमेह रोगी को रक्त में शुगर की मात्रा में उतार-चढ़ाव से कीटोन्स एसिडिक तत्व की मात्रा बढऩे से थकान बढ़ती है। इससे सांस फूलने की तकलीफ बढ़ती है।


मोटापा व हाइपोथायरॉडिज्म
किडनी फेल होना, सीओपीडी, खून की कमी, हाइपोथायरॉडिज्म, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा बढऩे व संतुलित आहार न लेने से भी सांस फूलना आम दिक्कत है।


धुआं भी एक कारण
वातावरण में गाडिय़ों, चिमनी आदि से निकले धुएं के बीच सांस लेना भी सांस फूलने की एक अहम समस्या है। अस्थमा रोगी इससे अधिक पीडि़त हैं।


...यों फूलती सांस
फेफड़ों की सबसे छोटी यूनिट होती है एयर एल्वॉली। इसका मुख्य कार्य सांस लेते समय शरीर में आई ऑक्सीजन को विभिन्न अंगों तक पहुंचाना है। फेफड़े में कफ, ब्लॉकेज या किसी अन्य रोग के कारण यदि ये एल्वॉली ब्लॉक हो जाती हैं, तो सांस फूलती है। इन एल्वॉली में रुकावट से ऑक्सीजन जब सभी अंगों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाती तो वह वापस लौटती है जिससे सांस बाधित होने लगती है। ब्रॉन्काइल ट्री में सूजन से जब एल्वॉली सिकुडऩे लगती है तो भी सांस संबंधी दिक्कत बढ़ जाती है। एलर्जी के मरीजों में सांस फूलने की समस्या सबसे ज्यादा होती है।


वजह जानना जरूरी
सांस फूलना कोई रोग नहीं बल्कि किसी रोग का एक लक्षण है। मरीज को उसकी शारीरिक अवस्था व रोग की गंभीरता के अनुसार दवाएं देते हैं। जैसे अस्थमा रोगी दवाओं के साथ इंहेलर साथ रखें।


समस्या है तो टालें नहीं
लंबे समय या गंभीर रूप से सांस फूलने की दिक्कत को टालें नहीं। हार्ट पेशेंट में इससे हार्ट फेल हो सकता है। सांस रोगी को सांस का अटैक आ सकता है। खून की कमी भी गंभीरता बढ़ा देती है।


राहत देंगे प्राणायाम और योग
नाड़ी शोधन : सुखासन में बैठकर दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका बंद कर पूरी सांस बाहर निकालें। बाईं नासिका से सांस भरकर तीसरी अंगुली से बाईं नासिका भी बंद कर सांस अंदर रोंकें। दायां अंगूठा हटाकर सांस बाहर छोड़ें।
अनुलोम-विलोम : अंगूठे से दाईं नासिका बंद कर बार्इं नासिका से सांस लें और फिर बार्इं नासिका अंगुलियों से बंद कर दाईं से सांस छोड़ें। ऐसा दूसरी नासिका से भी करें। प्रक्रिया को १५-२० बार दोहराएं।
भस्त्रिका : ध्यान मुद्रा में बैठकर लंबी गहरी सांस लें व ३-४ सेकंड अंदर रोकने के बाद धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें।
भ्रामरी : अंगूठा कान के ऊभरे भाग पर, तर्जनी अंगुली भौहों के बीच, मध्यमा आंख पर, अनामिका नाक पर व कनिष्ठा नाक के नीचे रख लंबी सांस लें। भंवरे की आवाज कर सांस छोड़ें।


तुरंत आराम के लिए १०-१५ मिनट के लिए शवासन में लेटें। मत्स्य क्रीड़ासन, बालशयनासन भी लाभ पहुंचाते हैं।


डॉ. राजेन्द्र सिंघवी, एमडी, वरिष्ठ फिजिशियन, जोधपुर
डॉ. चंद्रभान शर्मा, असि. प्रो. एवं निदेशक, योग एवं वेलनेस सेंटर, डॉ. एस आर आयुर्वेद यूनि. जोधपुर

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