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भीलवाड़ा में ओले गिरे, एक दर्जन जिलों में बारिश के बाद शीतलहर ने कंपकपाया

प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के असर के कारण एक दर्जन जिलों में गुरुवार सुबह बारिश का दौर चला। बुधवार देर रात जहां अजमेर में ओलाव्रष्टि हुई।

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जयपुर। प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के असर के कारण एक दर्जन जिलों में गुरुवार सुबह बारिश का दौर चला। बुधवार देर रात जहां अजमेर में ओलाव्रष्टि हुई। वहीं, भीलवाड़ा में गुरुवार को बेर के आकार के ओले गिरे। ओलों से खेतो में लगी सब्जियों को नुकसान हुआ। वही पेड़ों की टहनियां और पत्ते टूटकर नीचे गिर गए। खेतो में ओलों की चादर बिछ गई।

चित्तौडगढ़ जिले के बड़ीसादड़ी उपखंड क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने से उपखण्ड के पिंड जूनी गांव में खेत पर सिंचाई कर रही महिला कृषक की मौत हो गई। पिंड निवासी रामलाल व उसकी 55 वर्षीय पत्नी चांदी बाई खेत में काम कर रहे थे।

प्रदेश में सर्वाधिक बारिश बूंदी में 17 एमएम दर्ज की गई। इधर, बारिश के बाद गुरुवार को दिनभर शीलहर का असर देखने को मिला। दिन के तापमान में दो से तीन डिग्री तक की गिरावट देखने को मिली। माउंट आबू में सर्वाधिक कम रात का पारा रिकॉर्ड किया गया।

30 नवंबर तक शीतलहर
मौसम विभाग के अनुसार गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर चूरू, सीकर, सवाई माधोपुर, बूंदी, जयपुर, अजमेर और आस-पास के जिलों में बारिश दर्ज हुई है। पश्चिमी राजस्थान में 4 मिमी सँगरिया, हनुमानगढ़ में दर्ज हुई है। इसी प्रकार चित्तौडगढ़ में 16, सवाईमाधोपुर में 11, टोंक में 8, भीलवाड़ा में 5.9 और अजमेर में 5 मिलीमीटर बारिश हुई है। शुक्रवार और शनिवार को प्रदेश में मध्यम कोहरा छाए रहने की संभावना है वहीं, 30 नवंबर तक राज्य के उत्तरी भागों चूरू, सीकर, हनुमानगढ़ और गंगानगर में शीतलहर चलने की चेतावनी दी है।

जयपुर में छह डिग्री गिरावट
गुरुवार सुबह बारिश के बाद दिनभर आसमान साफ रहा। मौसम शुष्क रहने से दिन के तापमान में गिरावट रही। हवा में नमी की मात्रा 88 फीसदी तक रही। प्रदेशभर के शहरों का पारा दो से तीन डिगग्री गिरा। जयपुर में दिन का अधिकतम तापमान 24.2 डिग्री दर्ज किया गया। शाम को दो घंटे बाद ही पारा और गिर गया। सात बजे छह डिग्री की गिरावट के साथ 18 डिग्री पर पारा आ गया। माउंट आबू में न्यूनतम पारा पांच डिग्री दर्ज किया गया।

रबी की फसल को बारिश से फायदा, ओलो से नुकसान
कृषि आयुक्त डॉ ओम प्रकाश ने बताया कि कई जिलों में बारिश हुई है। यह फसलों के लिए संजीवनी से कम नहीं है। चना, गेहूं, सरसों समेत अन्य फसलों की बुवाई को 20 से 25 दिन के अंतराल में हुई है। इन फसलों को पानी की जरूरत है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक रबी की फसल की बुवाई अभी चल रही है। जिसमें कुल 98.6 लाख हैक्टेयर भूमि में बुवाई होनी है। अभी करीबन 53 लाख हैक्टेयर भूमि में बुवाई हो चुकी है। इसके तहत करीबन 40 लाख हैक्टेयर भूमि में सरसों, चना की बुवाई तो, 13 लाख हैक्टेयर भूमि में जौ और गेंहू की बुवाई हुई है। अभी कई जिलों में इनकी बुवाई चल रही है। लेकिन जहां ओले गिरे हैं, वहां नुकसान हुआ है।


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