
social media confluence
जयपुर.
तीन दिवसीय सोशल मीडिया कॉन्फ्लूएंस 3.0 (social media confluence) के समापन पर वक्ताओं ने अपने विचारों से भारत की तस्वीर को जाहिर किया। मालवीय नगर स्थित नारद ऑडिटोरियम में वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि सोशल मीडिया ने मोनोपॉली (monopoly) चलाने वाले मीडिया का भ्रम तोड़ दिया है। कोई व्यक्ति कुछ भी कहे, वही सत्य है। यह धारणा अब भारत में संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत को समझने व जानने के लिए भारत के ग्राउंड को जानना पडेगा। भारत का इंग्लिश में अनुवाद इंडिया नहीं भारत ही है, क्योंकि इंडिया शब्द विदेश की देन है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के किसी भी भाग में सभी की मान्यताएं एक हैं। देश के प्रांतों में भाषाएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन पूरा भारत एक है। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में भारत का विकास भारत की दृष्टि से ही संभव है। तभी इस कॉन्फ्लूएंस के माध्यम से भारत का विचार साकार हो सकता है।
पेरलर सेशन को सम्बोधित करते हुए आर्थिक विश्लेषक व स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि बजट सरकार की नीतियों का आईना होता है। सरकार का कार्यकलाप बजट में ही दिखता है। इसमें विकास का रोडमैप बनाने व अधूरे कार्यों को पूरा करने की परम्परा पुराने समय से ही रही है। कुछ शीर्ष अधिकारी व अर्थशास्त्री भी देश को विकास के रास्ते से भटकाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों के विकास से ही देश का विकास संभव है। इस मौके पर एडवोकेट डीके दुबे, अर्थ जगत से जुड़ी मीनल शर्मा और प्रमोद शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।
वर्कशॉप में लिया प्रशिक्षण
तीन दिवसीय सोशल मीडिया कॉन्फ्लूएंस (social media confluence) के तहत वर्कशॉप आयोजित की गई। जिसमें फोटोग्राफी व कैप्शन, कार्टून व एनिमेशन, ट्रैडस इन सोशल मीडिया, यू-ट्यूब चैनल व फेस टू फेस विद कैमरा की वर्कशॉप में अनेकों यूथ ने ट्रेनिंग ली। लगातार तीसरे साल आयोजित हुई कॉन्फ्लूएंस में प्रदेश के 22 जिलों समेत दूसरे राज्यों के सैकड़ों यूथ ने ट्रेनिंग ली।
Published on:
06 Aug 2019 06:05 am
