विद्युत अधिनियम, 2003 (प्रस्तावित संशोधित), बिल 2020 वापस लें केन्द्र : कल्ला

ऊर्जा मंत्री डॉ.बीडी कल्ला ने केन्द्र सरकार के विद्युत अधिनियम, 2003 (प्रस्तावित संशोधित), बिल 2020 को राज्यों के लिए प्रतिकूल बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

By: Prakash Kumawat

Published: 04 Jul 2020, 12:08 AM IST

विद्युत अधिनियम, 2003 (प्रस्तावित संशोधित), बिल 2020 वापस लें केन्द्र : कल्ला
बिल विकेन्द्रीकरण की मूल भावना के खिलाफः कल्ला
बिल के पारित होने से राज्यों की वित्तीय शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव

जयपुर, 3 जुलाई। ऊर्जा मंत्री डॉ.बीडी कल्ला ने केन्द्र सरकार के विद्युत अधिनियम, 2003 (प्रस्तावित संशोधित), बिल 2020 को राज्यों के लिए प्रतिकूल बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

ऊर्जा मंत्री कल्ला ने कहा कि यह बिल राज्यों की शक्ति के विकेन्द्रीकरण का विरोधाभासी और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। संविधान के अनुसार बिजली क्षेत्र समवर्ती सूची में शामिल है। केन्द्र सरकार की ओर से इस प्रस्तावित बिल का बिजली क्षेत्र से सम्बंधित आदेशों, नियंत्रण और विनियमन के केंद्रीयकरण की ओर झुकाव है, इससे राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण होगा तथा इससे राज्यों की वित्तीय और संचालन शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

डॉ. कल्ला शुक्रवार ने राज्यों के पॉवर एवं न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रियों की वर्चुअल कांफ्रेंस में केन्द्रीय ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री आर के सिंह से इस संशोधन बिल को वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा कि नियामक आयोग की शक्तियां राज्यों के पास ही रहनी चाहिए, केन्द्र को इनमें कोई दखल नहीं देना चाहिए। इस बिल के मसौदे पर उनकी कई राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों से चर्चा हुई है, जिन्होंने इस पर एतराज जाहिर किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस प्रस्तावित संशोधन बिल के बारे में राज्यों की भावना से अवगत कराने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।डॉ. कल्ला ने जयपुर में विद्युत भवन से इस वर्चुअल काफ्रेंस में शिरकत की। इसमें ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अजिताभ शर्मा, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी पी. रमेश, जयपुर डिस्कॉम के एमडी एके गुप्ता तथा राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के एमडी अनिल गुप्ता सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी मौजूद रहे।

राज्य की बकाया राशि का भुगतान करें केन्द्र
ऊर्जा मंत्री डॉ. कल्ला ने बताया कि सौभाग्य योजना के तहत राज्य में सोलर रेडिएशन की प्रचुर मात्रा के कारण 200 वाट के कनेक्शन के स्थान पर 100 वाट में ही कनेक्शन कर दिए गए है। इसमें राज्य की 11 करोड़ 98 लाख रुपए की राशि केन्द्र में बकाया है, उसे शीघ्र जारी किया जाए।
कल्ला ने केन्द्रीय राज्य मंत्री से आग्रह किया कि राज्य सरकार की ओर से 2855 मेगावाट सोलर एनर्जी प्लांट तथा 1426 मेगावाट विंड एनर्जी संयत्रों की स्थापना के लिए निविदाएं सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीई) को मंजूरी के लिए भेजी गई है, इन लम्बित निविदाओं के बारे में शीघ्र स्वीकृति जारी कराई जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में 5-5 हजार मेगावाट के सोलर एनर्जी के संयत्रों की स्थापना के लिए एनटीपीसी और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन के साथ सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इसके तहत राज्य को प्रत्येक यूनिट के लिए लेवी के रूप में 5 पैसे चार्ज करने की मंजूरी दिलाई जाए।

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