Cm Gehlot राम मंदिर पर बोले, यह मौका Pm Modi के लिए साहस दिखाने का

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Cm Ashok Gehlot )ने अयोध्या में बुधवार को होने वाले श्रीराम मंदिर (Ram temple) भूमि पूजन समारोह से एक दिन पहले टवीट किया है।

By: rahul

Published: 04 Aug 2020, 04:35 PM IST

राहुल सिंह / जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Cm Ashok Gehlot ) ने अयोध्या में बुधवार को होने वाले श्रीराम मंदिर (Ram temple)भूमि पूजन समारोह से एक दिन पहले टवीट किया है। गहलोत ने कहा कि 5 अगस्त को होने वाला राममंदिर शिलान्यास प्रधानमंत्री के लिए साहस दिखाने तथा लोगों को यह संकल्प लेने के लिये कहने का एक अवसर है कि मानवता पर लगे छुआछूत के कलंक को मिटाएं तथा दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के साथ समानता का व्यवहार करें। गहलोत ने कहा कि ऐसा करके हम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को पूरा कर सकते हैं और उनकी भावना पर खरे उतर सकते हैं।

प्रियंका और कमलनाथ भी बोले, जय सियाराम

इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का बयान आया था कि, अयोध्या राम मंदिर भूमि पूजन समारोह एकता का संदेश देगा।
इस संदेश को कांग्रेस के जैसलमेर में कांग्रेस विधायकों को भी सुनाया गया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जैसलमेर पहुंचकर एक प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिए प्रियंका का सन्देश पढ़कर सुनाया। अपने सन्देश में प्रियंका ने भगवान राम के चरित्र को भारतीय संस्कृति, दर्शन, सभ्यता का प्रतीक और भारतीय भूभाग में मानवता को जोडऩे का सूत्र बताया है।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि अयोध्या में रामलला के मंदिर का भूमि पूजन समारोह राष्ट्रीय एकता बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का कार्यक्रम साबित होगा। प्रियंका ने एक जारी बयान में कामना करते हुए कहा, ‘सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनबद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सब में हैं, राम सबके साथ हैं। भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व तथा सांस्कृतिक समागम का अवसर बने। जय सियाराम।‘

उन्होंने भगवान राम के चरित्र को एकता का सूत्र बताया और कहा कि दुनिया और भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है। भगवान राम, माता सीता और रामायण की गाथा हजारों वर्षों से भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक स्मृतियों में प्रकाशपुंज की तरह आलोकित है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भारतीय मनीषा रामायण के प्रसंगों से धर्म, नीति, कर्तव्यपरायणता, त्याग, उदात्तता, प्रेम, पराक्रम और सेवा की प्रेरणा पाती रही है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक रामकथा अनेक रूपों में स्वयं को अभिव्यक्त करती चली आ रही है। श्रीहरि के अनगिनत रूपों की तरह ही रामकथा हरिकथा अनंता है।

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