कच्ची बस्तियों में मिलेंगे पट्टे, इनके लिए बने आवास दिए जाएंगे किराए पर

 

—पहाड़ी क्षेत्र में भी पट्टे देने का मन बना रहा हैरिटेज निगम

By: Ashwani Kumar

Updated: 19 Sep 2021, 12:45 PM IST

जयपुर। राजधानी में कच्ची बस्तियों में रह रहे लोगों को भी प्रशासन शहरों के संग अभियान में पट्टे जारी किए जाएंगे। वहीं, कच्ची बस्तियों में रह रहे लोगों के लिए जो आवास बने हैं, उनको किराए पर देने की तैयारी शुरू हो गई है। जल्द ही इसकी शुरुआत हो गई है।
इतना ही नहीं गैर अधिसूचित कच्ची बस्तियों में भी सर्वे कराए जाने के लिए ग्रेटर नगर निगम ने स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखा है। जो पत्र आयुक्त यज्ञ मित्र सिंह देव ने लिखा है, उसमें बताया गया है कि गंदी बस्ती सुधार समिति की बैठक में ऐसा सर्वे कराए जाने का निर्णय लिया गया है। जिन बस्तियों का सर्वे नहीं करवाया गया है, उनका सर्वे करवाया जाए, ताकि प्रशासन शहरों के संग अभियान में अधिक से अधिक पट्टे जारी किए जा सकें। वहीं, हैरिटेज नगर निगम तो गैर मुमकिन पहाड़ी क्षेत्र पर भी पट्टे जारी करने की मांग कर रहा है। इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखा है। हालांकि, इस तरह के जो भी प्रकरण पहले आए हैं, उसमें वन विभाग ने मंजूरी नहीं दी है। निगम अधिकारियों का कहना है कि गैर मुमकिन पहाड़ी क्षेत्र जेडीए के राजस्व रिकॉर्ड में है। करीब 300 से 400 पट्टों के लिए लोगों ने आवेदन लगा रखे हैं। शिवाजी नगर के अलावा गुर्जर घाटी क्षेत्र से ये आवेदन लगे हुए हैं।


जल्दबाजी में बनाए आवास, अब नहीं मिल रहे पट्टे
आदर्श नगर स्थित खड्डा बस्ती के जिन परिवारों को जयसिंहपुरा खोर में शिफ्ट किया गया था, ये योजना इकॉलोजिकल जोन में आती है। जब यहां रह रहे लोगों ने पट्टों के लिए जेडीए में आवेदन किया तो जेडीए जोन—10 की ओर से बताया गया है कि यह योजना इकोलॉजिकल जोन में आती है। ऐसे में पट्टे नहीं दिए जा सकते।


इधर, आवासों को किराए पर देने की तैयारी
—सीकर रोड स्थित स्वप्नलोक योजना में 588 आवास हैं। इनको रेंटल स्कीम के तहत किराए पर दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। 800 से लेकर 1000 रुपए तक किराया निर्धारित कर रखा है। यदि योजना सफल हुई तो इसी योजना के द्वितीय चरण के 426 आवासों को भी किराए पर दिया जाएगा।
—जयसिंहपुरा खोर में कच्ची बस्ती में रहने वााले लोगों के लिए 2882 आवास बनाए। इनमें से करीब 1200 आवासों में परिवार रह रहे हैं। शेष अभी तक खाली पड़े हैं।
—ये सभी आवास 2016 में बन चुके थे, लेकिन राजनीतिक दखल की वजह से कच्ची बस्तियों को शिफ्ट नहीं किया जा सका।

Ashwani Kumar Reporting
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