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रंग मल्हार 2020 : कैरी बैग पर खिले कला के रंग, ऑनलाइन किया प्रदर्शन

rang malhar 2020: राजस्थान ललित कला अकादमी के सहयोग से 11वें 'रंग मल्हार' कला उत्सव का ऑनलाइन आयोजन किया गया। सावन में अच्छी बरसात कामना के लिए हर साल आयोजित होने वाले 'रंग मल्हार' में कलाकार कलाकृतियां बनाने के बाद शहर में जाकर किसी खास स्थान पर इनका प्रदर्शन करते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण यह आयोजन ऑनलाइन किया गया। कलाकारों ने अपने घर या स्टूडियों पर रह कर प्रदेश में अच्छी बरसात की कामना के साथ कोरोना से बचने का संकल्प भी लिया।

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रंग मल्हार' कला उत्सव

रंग मल्हार' कला उत्सव

जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी के सहयोग से 11वें 'रंग मल्हार' कला उत्सव का ऑनलाइन आयोजन किया गया। सावन में अच्छी बरसात कामना के लिए हर साल आयोजित होने वाले 'रंग मल्हार' में कलाकार कलाकृतियां बनाने के बाद शहर में जाकर किसी खास स्थान पर इनका प्रदर्शन करते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण यह आयोजन ऑनलाइन किया गया। कलाकारों ने अपने घर या स्टूडियों पर रह कर प्रदेश में अच्छी बरसात की कामना के साथ कोरोना से बचने का संकल्प भी लिया। कलाकारों ने तरह तरह के रंग-बिरंगे कैरी बैग बनाए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस बार इस आयोजन में देश-विदेश के करीब 1500 कलाकारों ने पंजीयन करवाया था।

कैरी बैग पर चित्र बना कर संदेश देने की पहल
कला उत्सव के संयोजक विद्यासागर उपाध्याय का कहना है आधुनिकता के साथ हम पुरानी परंपराओं और वस्तुओं के उपयोग करना भूल रहे हैं, जो कभी पर्यावरण की हिस्सा थी। कैरी बैग का उपयोग पुराने समय से होता रहा है। इससे गांवों में लोगों को रोजगार भी मिलता था और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता था। अब समय आ गया है कि पॉलिथीन पूरी तरह से बंद की जाए और हाथ का थैला इस्तेमाल कर पर्यावरण को बचाने की पहल की जाए। ललित कला अकादमी के सचिव विनय शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों से बने कैरी बैग इको फ्रेंडली तो होते ही हैं, साथ ही ये व्यक्ति के व्यक्तित्व को भी दर्शाते हैं। इस आयोजन के जरिए कलाकार लोगों को जागरूक किया। उत्सव में हिस्सा ले रहे कलाकार अजीत कुमार ने हैंड मेड पेपर से छोटा सा कैरी बैग बना कर सेव टाइगर का मैसेज दिया है। वहीं युवा कलाकार राजेन्द्र प्रसाद मीना ने भी कैरी बैग बना कर अलग अलग संदेश दिए।

ऐसे हुई थी शुरुआत
2010 में राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में बारिश नहीं होने से सुखे से जूझ रहे थे। ऐसे में तब वरिष्ठ कलाकार विद्यासागर उपाध्याय ने जयपुर में रंग मल्हार नामक इस उत्सव की शुरूआत की थी। संयोग से उस दौरान अच्छी बारिश हो गई। तब से यह आयोजन हर साल हो रहा है। 2010 में अम्ब्रेला, 2011 में हैट, 2012 में मास्क, 2013 में फिरकी, 2014 कार, 2015 में ग्लोब, 2016 में हेलमेट, 2017 में साइकिल और 2018 में लालटेन और 2019 में बिजणी (हाथ की पंखी) ऑब्जेक्ट पर चित्रकारों ने कल्पनाओं को साकार किया था। इस बार कलाकारों ने कैरी बैग पर कलाकृति बना कर संदेश दिया।