तेंदुए को खेतड़ी के जंगल में छोडऩा गलत

वन्यजीवप्रेमी व वन्यजीव विशेषज्ञों ने जताई नाराजगी, कार्यशैली पर उठाए सवाल

 

जयपुर. राजधानी में आबादी क्षेत्र से एक तेंदुए का रेस्क्यू कर खेतड़ी छोडऩे का मामला तूल पकड़ रहा है। वन्यजीव प्रेमियों व वन्यजीव विशेषज्ञों में वन विभाग के अफसरों के इस मनमर्जी के फैसले के खिलाफ गहरा आक्रोश है। हैरत की बात है कि अफसरों ने इसकी जानकारी वनमंत्री सुखराम विश्नोई को भी नहीं दी। पुणे की वन्यजीव विशेषज्ञ विद्या आत्रेय का कहना है कि तेंदुए घनी आबादी के साथ बिना लोगों को तकलीफ दिए सदियों से साथ-साथ रहते आए हैं। तेंदुए को आबादी में पकड़कर उसी स्थान पर छोड़ा जाना चाहिए, जो उनका मूल स्थान था। नई जगह पर छोडऩे से वह ज्यादा उत्पाती हो जाता है। एक वन्यजीव प्रेमी सुनित जुुनेजा का कहना है कि अफसरों ने जिम्मेदारी से बचने के लिए यह फैसला लिया है, जो गलत है। बढ़ते कुनबे को इस तरह खाली नहीं किया जा सकता। उस तेंदुए की लगातार निगरानी कर सकते थे। उसके दोबारा आने के डर से उसे वहां भेज दिया। जंगल शहर से जुड़ा है। संख्या भी ज्यादा है, ऐसे में आए दिन तेंदुए आएंगे। ऐसे खेतड़ी भेजते रहेंगे तो देश का पहला लेपर्ड प्रोजेक्ट खतरे में आ जाएगा।

manoj sharma Desk
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