याचिकाकर्ताओं को राष्ट्र की अखंडता के खिलाफ न देखा जाए

जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंध के मामले पर सुनवाई

Anoop Singh

November, 2001:51 AM

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंध के मामले पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि याचिकाकर्ताओं और उनके पक्ष के लोगों को राष्ट्र की अखंडता के खिलाफ देखा जाए। प्रतिबंध लागू हुए 106 दिन हो गए हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने पूछा कि वो कोर्ट में मौजूद क्यों नहीं है? जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि सॉलिसिटर जनरल कोर्ट नंबर 3 में किसी अन्य मामले में दलील दी रहे हैं। सुनवाई के दौरान दुष्यंत दवे ने कहा कि प्रतिबंध लागू हुए 106 दिन हो गए हैं तब जस्टिस रमना ने पूछा, क्या आप देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट की आलोचना कर रहे हैं? तब दवे ने कहा कि नहीं। मैं प्रतिबंधों को नहीं उठाने के लिए सरकार की आलोचना कर रहा हूं।
हांगकांग का दिया उदाहरण
दवे ने कहा कि 7 मिलियन लोगों के अधिकार किसी के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। दवे ने दलील दी कि सरकार इस आधार पर प्रतिबंधों को सही नहीं ठहरा सकती है, क्योंकि कश्मीर वर्षों से आतंकवाद की चपेट में है। दवे ने हांगकांग का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हफ्तों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन तब भी एक कम्युनिस्ट राज्य ने हमारे जैसे प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं।
जनसंख्या नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग

नई दिल्ली. देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग करने वाली याचिका खारिज करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। पिछले 3 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि जनसंख्या नियंत्रण पर नीति बनाना सरकार का काम है। याचिका में कहा गया है कि देश में बढ़ रहे अपराध और नौकरियों की कमी के साथ-साथ संसाधनों पर बोझ बढऩे के पीछे सबसे बड़ी वजह बढ़ती जनसंख्या है।

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