इनके नए आइडिया ने बदली लोगों की जीवनशैली

पिता के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया था। तब इन्होंने अपने छोटे भाई के साथ मिलकर छोटे-मोटे काम करना शुरू किया। सुबह स्कूल जाने से पहले पड़ोसियों के घरों में अंडें बांटने का काम किया करते थे।

By: Archana Kumawat

Published: 19 Aug 2020, 10:47 PM IST

इनका जन्म 1886 में न्यूयॉर्क में हुआ था। ये अपने माता-पिता की पहली संतान थे। इनकी तीन बहिनें और एक भाई था। पिता का वकालत का पेशा था, कुछ समय बाद उन्होंने अपना बिजनेस शुरू कर लिया था। जब ये चार साल की हुए तभी माता-पिता न्यूयॉर्क से इलिनोइस आ गए थे। जीवन आराम से गुजर रहा था। माता-पिता बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए दिन-रात मेहनत करते और बच्चों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने देते लेकिन कौन जानता था कि ये दिन ज्यादा लंबे नहीं है। 17 साल की उम्र में ही एक हादसे ने सबकुछ बदल दिया था। 1903 में भीषण ट्राम एक्सीडेंट में पिता की मौत हो गई थी। पिता के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया था। तब इन्होंने अपने छोटे भाई के साथ मिलकर छोटे-मोटे काम करना शुरू किया। सुबह स्कूल जाने से पहले पड़ोसियों के घरों में अंडें बांटने का काम किया करते थे। शाम के समय घोड़ों की सफाई किया करते थे। कुछ ही समय में इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने का काम मिल गया था। इसी समय इन्होंने अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई भी पूरी कर ली थी। 1908 में इलिनोइस के लेक फॉरेस्ट में लेक फॉरेस्ट एकेडमी से ग्रेजुऐशन की डिग्री ली।
इलेक्ट्रिसिटी में नया करने का आया विचार
कॉलेज की पढ़ाई के समय भी ये परिवार का खर्चा चलाने के लिए इंश्योरेंस की पॉलिसी को बेचा करते थे। एक दिन कॉमनवेल्थ एडीसन कंपनी के कोषाध्यक्ष सचिव के पास इंश्योरेंस की पॉलिसी को बेचने गए, हालांकि उस व्यक्ति ने पॉलिसी तो नहीं ली लेकिन इनके व्यक्तित्व से इतना प्रभावित हुए कि उन्हें नौकरी पर रख लिया। इस दौरान इन्होंने इलेक्ट्रिसिटी के क्षेत्र में तेजी से विकास को देखा। तभी इनके मन में कुछ नया करने का विचार आया। 1908 में इनकी मुलाकात एक हार्डवेयर व्यापारी से हुई, जो साउथ बेंड में होम वॉशर की मैन्यूफैक्चिरिंग कंपनी खोलना चाहते थे। व्यापारी ने इन्हें साउथ बेंड में सेल्स डिपार्टमेंट को संभालने की बात कही। इन्होंने इस ऑफर को स्वीकार कर लिया लेकिन कपंनी फेल हो गई। हालांकि इनके पास अब हैंड वॉशर का पेटेंट था।
फिर बनाई इलेक्ट्रिक वॉशिंग मशीन
1911 में अपने चाचा के बेटे के साथ इन्होंने मोटर वायरिंग बनाने का काम शुरू किया। कुछ ही समय बाद अपने छोटे भाई के साथ अप्टान मशीन कंपनी शुरू की, जो वॉशिंग मशीन बनाने का काम करती थी। बाद में यही कंपनी वर्लपूल के नाम से मशहूर हुई और ये व्यक्ति कोई और नहीं लुईस अप्टन ही थे। कंपनी के सहसंस्थापक इनके छोटे भाई फेड्रिक स्टेनले अप्टन थे। शुरुआत में यह कंपनी सिर्फ इलेक्ट्रिक वाशिंग मशीन बनाती थी। 1929 में इस कंपनी का नाम नाइंटीन हंड्रेड मशीन कंपनी और 1960 में इसे वर्लपूल कॉरपोरेशन का नाम दिया गया। 1952 में लुईस इस दुनिया से चले गए। आज पूरी दुनिया में इस कंपनी के 92 हजार से भी ज्यादा एम्प्लॉइज काम करते हैं और दुनियाभर में 70 मैन्यूफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर हैं।

Archana Kumawat
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