मौनी अमावस्या पर शनि देव करेंगे राशि परिवर्तन, स्नान, पितर पूजन और दान पुण्य का मिलेगा विशेष लाभ

मौनी अमावस्या पर पितरों का पूजन और दान पुण्य और तीर्थों पर स्नान का विशेष दिन

जयपुर.पितरों के पूजन, श्राद्ध तर्पण और दान पुण्य के लिए विशेष माने जाने वाली मौनी अमावस्या 24 जनवरी को है। शास्त्रानुसार माघी मौनी अमावस्या को सूर्योदय होने के साथ हरिद्वार व प्रयागराज में गंगा स्नान को पवित्र माना गया है। इस दिन मौन धारण करने से आध्यात्मिक विकास होता है। मान्यतानुसार इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है, इसलिए इस दिन को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग के साथ सूर्य, चंद्रमा का शनि की राशि में होने का संयोग भी इस दिन रहेगा।


शनिदेव करेंगे राशि परिवर्तन

इस दिन न्याय के देवता शनिदेव अपनी स्व राशि मकर में प्रवेश करेंगे। यह योग 30 साल बाद फिर से बना है। माघ मास की मौनी अमावस्या पर सुबह 9.56 बजे शनि का राशि परिवर्तन होगा। स्व राशि में शनि का परिभ्रमण काल 28 अप्रेल 2022 तक रहेगा। इस समयावधि में देश में नवीन तकनीक के साथ संचार क्रांति की एक नई शुरुआत होगी। शनि अपनी स्व राशि में अधिक बलवान रहेंगे। इन्हें देवों में न्यायाधीश का दर्जा है, इसलिए न्याय प्रणाली और अधिक मजबूत होगी।

ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि ग्रहों में शनि का राशि परिवर्तन इसलिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि यह 12 राशियों का अपना एक चक्र 30 साल में पूरा करता है। शनि के मकर राशि में पहुंचने से वृश्चिक राशि वालों को शनि की साढ़े साती से मुक्ति मिलेगी। कुंभ राशि पर साढ़े साती शुरू होगी। वृषभ व कन्या ढैया से मुक्त होंगे। मिथुन व तुला पर शनि की ढैया शुरू होगी।

पं.पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि इस दिन से द्वापर युग की शुरुआत भी हुई थी। जो भगवान कृष्ण का युग माना जाता है। इस दिन दान पुण्य का काफी महत्व है। यदि तीर्थ स्थल पर स्नान कर पाना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लेना चाहिए। तेल, तिल, जूते, काले गरम कपड़े, दूध, चावल और पताशा आदि चीजों का दान करना चाहिए।

Deepshikha Vashista Desk
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