अर्धसैनिक बलों और कर्मचारियों के लिए पेंशन हो बहाल

देश की सुरक्षा और विकास में अपना जीवन खपाने वाले अर्धसैनिक बलों और लाखों कर्मचारियों को पेंशन से वंचित कर देना सरकार की गैर जिम्मेदाराना प्रवृत्ति को दर्शाता है।

जयपुर। पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि देने एवं जनवरी 2004 के बाद सेवा में आए अद्र्धसैनिक बलों सहित लाखों कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की मांग को लेकर न्यू पेंशन स्कीम एम्पलाइज फैडरेशन ऑफ राजस्थान के राज्यव्यापी आह्वान पर कलेक्ट्रेट सर्किल पर शुक्रवार को कैंडल मार्च निकाला गया। प्रभात शर्मा ने बताया कि सैन्य बलों की भांति ही 24 घंटे देश की सेवा में तत्पर रहने वाले अर्धसैनिक बलों के जवानों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन से वंचित कर बदहाल जीवन जीने के लिए मजबूर करना न्यायोचित नहीं है।
ओमप्रकाश मीणा ने बताया कि पेंशन देश के विकास और देश की सुरक्षा में अर्धसैनिक बलों और कर्मचारियों के योगदान का प्रतिफल है, जिससे उन्हें वंचित कर देना संविधान सम्मत नहीं है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स समेत तमाम अर्धसैनिक बलों के जवान तपती गर्मी से लेकर कड़ाके की ठंड में देश की सुरक्षा के लिए डटे रहते हैं तो रिटायरमेंट के बाद वे सम्मानजनक और खुशहाल जीवन जी सकें, यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। शंकर सैनी ने सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुक्मरानों पर दोगलेपन का आरोप लगाते हुए कहा कि एक बार एमएलए, एमपी बन जाने पर नेताओं की आजीवन पेंशन चालू हो जाती है। वहीं दूसरी ओर देश की सुरक्षा और विकास में अपना जीवन खपाने वाले अर्धसैनिक बलों और लाखों कर्मचारियों को पेंशन से वंचित कर देना सरकार की गैर जिम्मेदाराना प्रवृत्ति को दर्शाता है। अगर सरकार कर्मचारियों की मांगों को इसी प्रकार नजरअंदाज करती रही तो कर्मचारी सड़कों पर उतर आएंगे और सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेंगे।

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Gaurav Mayank
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