नाराज किसान कर रहे हैं कूच...जानिए आाखिर क्या है वजह

नाराज किसान कर रहे हैं कूच...जानिए आाखिर क्या है वजह
नाराज किसान कर रहे हैं कूच...जानिए आाखिर क्या है वजह

Ashish sharma | Updated: 09 Oct 2019, 06:55:20 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

Rajasthan Kisan's Protest : किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार भले ही कई कदम उठा रही हैं लेकिन हकीकत यह है.....

जयपुर

Rajasthan Kisan's Protest : किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार भले ही कई कदम उठा रही हैं लेकिन हकीकत यह है यह कोशिशें किसानों को खास राहत नहीं दे पा रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि कड़ी मेहनत और खून पसीना बहाकर किसान जो उपज पैदा करते हैं, उन्हें उस पूरी उपज का पूरा दाम ही नहीं मिल पाता है। ऐसे में किसानों को मजबूरन औने पौने दामों में अपनी उपज बेचनी पड़ती है। ऐसा करने से न केवल किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं बल्कि सरकारों के प्रति उनमें नाराजगी भी बरकरार है। राजस्थान में इन दिनों किसान उपज का पूरा मूल्य नहीं मिलने से नाराज हैं। किसानों के कई संगठनों से मिलकर बनी हुई किसान महापंचायत के नेतृत्व में किसानों ने विरोधस्वरूप और सरकार का ध्यान खींचने के लिए राज्य की राजधानी जयपुर की तरफ आज कूच भी शुरू कर दिया है। कई जिलों से आए किसान दूदू में एकत्रित हुए और फिर जयपुर के लिए पैदल कूच कर दिया। किसानों की इस नाराजगी की प्रमुख वजह है कि उन्हें उपज के पूरे दाम नहीं मिल रहे।
किसानों को नहीं मिलता पूरा लाभ
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट का कहना है कि केन्द्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से लाभकारी मूल्य पर उपज खरीदने के दावे करती है। जबकि हकीकत यह है कि केन्द्र की एमएसपी योजना का किसानों को पूरा लाभ ही नहीं मिल पाता है। इसके पीछे का कारण है कि केन्द्र सरकार नैफेड के जरिए राज्यों के किसानों से जो उपज खरीददती है, वो संबंधित राज्य में होने वाली कुल पैदावार का सिर्फ 25 फीसदी हिस्सा ही होता है। ऐसे में किसानों को बाकी उपज को बाजार में औने पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

ऐसा हो तो दावे बने हकीकत
किसान प्रतिनिधि रामेश्वर चौधरी का कहना है कि इसी मजबूरी के चलते किसान ही माली हालत और खराब हो जाती है। किसान प्रतिनिधियों का यह कहना है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के सरकारी दावे और कोशिशें तब तक हकीकत में नहीं बदल सकते जब तक किसानों से उनकी पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था नहीं कर दी जाएगी। इसके लिए सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर स्थायी खरीद केन्द्र बनाए जाने चाहिए। इतना ही नहीं, इन केन्द्रों पर सालभर खरीद की जानी चाहिए। किसान महापंचायत की यह मांग है कि सरकार किसानों से उनकी पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था करे।

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