मुख्य कैम्पस, क्वार्टर, हॉस्टल हुए राजस्थान यूनिवसिर्टी के नाम, चारों संघटक कॉलेज होना अभी बाकी

- 74 वर्ष बाद आखिरकार विश्वविद्यालय के नाम हुई 522 बीघा जमीन, अभी शेष भूमि नामांतरण की प्रक्रिया भी जारी
- दस वर्ष पहले 323 बीघा जमीन की गई थी नाम

By: Jaya Gupta

Published: 18 Sep 2021, 07:28 PM IST


जयपुर। प्रदेश के सबसे पुराने विश्वविद्यालय के स्थापना के 74 वर्ष बाद आखिरकार भूमि नाम हो गई। अब तक 522 बीघा जमीन विश्वविद्यालय के नाम कर दी गई है और अभी नामांतरण की प्रक्रिया जारी है। अभी तक जेडीए सर्कल से गांधी सर्कल तक राजस्थान विश्वविद्यालय का मुख्य भवन व मुख्य भवन में पीछे के हॉस्टल, भाभा हॉस्टल, सीवी रमन हॉस्टल सहित पीछे का पूरा क्षेत्र, कॉन्वोकेशन सेटंर, विवि से खेतान पॉलोटेक्निक कॉलेज की तरफ एसीपी दफ्तर, प्रोफेसर क्वार्टर, पोद्दार मैनेजमेंट कॉलेज का पीछे हिस्सा विवि के नाम हो चुका है। जबकि अभी तक चारों संघटक कॉलेज विश्वविद्यालय के नाम नहीं है। राजस्थान व कॉमर्स कॉलेज, पीछे हॉस्टल, ग्राउंड व झालाना तक का हिस्सा अभी भी वन विभाग के नाम है। वहीं महारानी व महाराजा कॉलेज को अभी नामांतरण किया जाना शेष है। इसमें काफी भूमि अभी विवादित है। सर्वे प्रक्रिया जारी है। जानकारी के अनुसार 157 बीघा जमीन पर अभी वन विभाग के नाम है, जिस पर विवि का कब्जा है।

पत्रिका की पहल पर यों हुआ नामांतरण
विश्वविद्यालय की स्थापना के समय 8 जनवरी 1947 को राजस्थान विश्वविद्यालय को करीब आठ सौ बीघा भूमि आवंटित की गई थी मगर रेकॉर्ड में विवि के नाम नहीं होने के कारण काफी हिस्से पर कब्जा हो गया। करीब दस वर्ष पहले राजस्थान पत्रिका ने अभियान चलाया और पहली बार विवि के नाम 323 बीघा भूमि की गई। अब जिला प्रशासन के वर्तमान अधिकारियों ने पहल तक ढाई माह में दो सौ बीघा भूमि नामांतरण कर दी है।

दरअसल, विवि में जिला कलक्टर, एडीएम प्रथम, एसडीएम जयपुर, तहसीलदार जयपुर सभी राजस्थान विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं। ढाई महीने में दो चरणों में यह भूमि नामांतरण की गई। अभी 60 बीघा भूमि का नामांतरण अगले कुछ दिनों में कर दिया जाएगा। विवि के अधीन कुल कुल 680 बीघा जमीन है। महारानी व महाराजा कॉलेज की भूमि इसके अतिरिक्त है। ये दोनों तत्कालानी किशनपोल गांव में थे, वहां का सर्वे अभी चल रहा है।

ये भूमि की गई नाम
गांव ------------- भूमि नामांतरण -- वन विभाग के नाम
महादेव पुरा ---------- 242 बीघा --- 0
चक भवानी शंकरपुरा ------ 218 बीघा -- 157 बीघा
मोती डूंगरी ------- 61 बीघा ---- 0
कुल ---------- 522 बीघा ------ 157 बीघा

- सर्वे प्रक्रिया जारी है। जल्द ही 60 बीघा जमीन और नामांतरण कर देंगे। वन विभाग से भी बातचीत जारी है।
- राकेश मीना, एसडीएम जयपुर

- निर्विवादित भूमि को पहले नामांतरण किया गया है। राजस्व खातों में अब विवि की भूमि विवि के नाम कर रहे हैं। जो भूमि पर विवाद है, उसे भी सुलझा रहे हैं।
- इकबाल खान, एडीएम प्रथम
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Jaya Gupta Reporting
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