राजस्थान समेत पूरे भारत में SC-ST Act का विरोध, भारत बंद के आह्वान को लेकर सरकारें आई "अलर्ट मोड़" में

राजस्थान समेत पूरे भारत में SC-ST Act का विरोध, भारत बंद के आह्वान को लेकर सरकारें आई

rohit sharma | Publish: Sep, 05 2018 04:19:42 PM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 04:21:59 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

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जयपुर ।

राजस्थान समेत पूरे देश में SC-ST Act के संशोधित बिल 2018 के विरोध में गुरुवार बंद का आह्वान किया है। प्रस्तावित बंद को लेकर सरकार भी अलर्ट मोड़ में आ गई है और राजस्थान समेत पूरे देश में कड़े बंदोबस्त किए जा रहे हैं। बंद को सफल बनाने के लिए प्रदेश, संभाग और तहसील स्तर पर टीमों का गठन भी किया गया है।क्या है SC/ST Act एक्ट?

मोदी सरकार ने SC-ST Act में संशोधन कर मूल स्वरूप में बहाल करने के बाद सवर्णों में भाजपा के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते 6 सितंबर यानि कल SC/ST Act के विरोध में पूरे देश में bharat band का आह्वान किया है। राजस्थान समेत तमाम शहरों में सर्व समाज संघर्ष समिति भारत बंद का समर्थन कर रही है। एससी/एसटी एक्ट में संसोधन के कारण सbharat bandh liveवर्ण आक्रोश में हैं जिसके चलते कल प्रस्तावित भारत बंद है।

भारत बंद के आह्वान के चलते देश के कई राज्यों में सरकारें अलर्ट मोड़ में आ गई हैं और बंद के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से निपटने के लिए कड़े इंतज़ाम कर रही है। वहीं भोपाल में बंद के आह्वान के चलते कई जिलों में धारा भी 144 लगाई गई है। वहीं राजस्थान में समता आंदोलन समिति की ओर से छह राष्ट्रवादी मांगों के समर्थन में राजस्थान बंद का आहृवान किया गया है। अध्यक्ष पाराशर नारायण ने बताया कि समता आंदोलन समिति प्रदेश, संभाग, तहसील स्तर पर संपर्क कर बंद को सफल बनाएगी।

समिति की ओर से एससी, एसटी अत्याचार संशोधन अधिनियम—2018 निरस्त करने, एससी, एसटी से क्रिमीलयेर को बाहर करने, पदोन्नति में जातिगत आरक्षण को बंद करने, पीडित सामान्य और ओबीसी को मुआवजा देने, चुनावों में सीटो का अविधिक आरक्षण बंद करने, समता विधायक सलाहकार परिषद को कानूनी मान्यता देने की मांग की जा रही है।


क्या है SC/ST Act एक्ट?

SC/ST Act अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ होने वाले भेदभाव व अत्याचार को रोकने के लिए वर्ष 1989 में बनाया गया था। जम्मू कश्मीर को छोड़कर ये पूरे देश में लागू है। इस एक्ट के तहत जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होता है। तुरंत गिरफ्तारी होती है। इस तरह के मामलों में अग्रिम जमानत नहीं मिलती है। सिर्फ हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकती है। एससी/एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होती है।

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