जा रहे आज भी झाड़ फूंक करने वाले बाबाओं के पास

मनोचिकित्सालय में मनोचिकित्सा पुनर्वास केंद्र भवन में संगोष्ठी का आयोजन

By: Ashiya Shaikh

Published: 24 May 2018, 04:19 PM IST

जयपुर .सीजोफ्रेनिया दिवस के अवसर पर मनोचिकित्सालय के मनोचिकित्सा पुनर्वास केंद्र भवन में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मनोचिकित्सा विभाग के चिकित्सक शिक्षकों ने सीजोफ्रेनिया बीमारी के बारे में बताया कि इस रोग से पीड़ित रोगी में भ्रम कि स्थिति दर्शाता है। जिस वजह से पीड़ित व्यक्ति अधिकतर कल्पनाओं में जीता है जो वास्तविकता से अलग होती हैं। कार्यकम के दौरान मनोचिकित्सालय के विभागाध्यक्ष व अधीक्षक डॉक्टर आर के सोलंकी ने एक कहानी के माध्यम से बताया कि इस रोग से पीडि़त व्यक्ति में भ्रम व शक की अवस्था में अपने पारिवारिक और सामाजिक व्यवहार के प्रति उदासीन होकर उत्साह में कमी व भावनाओं के बदलने से असमानता व्यहवार दर्शाता है। इस कड़ी में वरि.आचार्य डॉ डॉक्टर परमजीत सिंह, आचार्य डॉक्टर सुरेश गुप्ता और डॉक्टर ललित बत्रा ने सीजोफ्रेनिया रोग को पहचान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आज भी राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस स्थिति में झाड़ फूँक कराने वाले बाबाओं के पास जाते हैं। जहां उनका इलाज नहीं हो पाता और इसी प्रकार जानकारी प्राप्त कर मनोचिकित्सा के पास आते हैं। इस मौके पर सहायक आचार्य डॉक्टर गुंजन ने इस रोग से बच्चों की मानसिकता पर पढऩे वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताया कार्यक्रम में सभी ने एकमत होकर कहा कि सीजोफ्रेनिया से पीडि़त रोगी का इलाज इतना जल्दी हो सके शुरू कर देना चाहिए। ताकि रोगी को सीजोफ्रेनिया के शिकार होने से बचाया जा सके। कार्यक्रम में मौजूद मनोचिकित्सकों ने बताया कि इस रोग में व्यक्ति काफी हिंसक हो जाता है। यह तककि वे खुद को और अपने करीबियों को नुकसान पहुचाने की कोशिश करता है। वहीं कुछ रोगी तो खुदखुशी भी कर लेते है। ऐसे समय में रोगी को परिवार के साथ की ज्यादा से ज्यादा जरूरत होती है। मरीज को इस रोग से बचाने के लिए मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए और उसका समय रहते इलाज करवाना चाहिए।

 

 

Ashiya Shaikh
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