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वैज्ञानिकों की चेतावनी, जलवायु परिवर्तन के कारण और बढ़ेंगे टर्बुलेंस…हवाई यात्रियों को बरतनी होगी सावधानी

ग्लोबल वार्मिंग जेट स्ट्रीम और अधिक खतरनाक बना रही है

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Global Warming

ग्लोबल वार्मिंग जेट स्ट्रीम और अधिक खतरनाक बना रही है

जयपुऱ। आमतौर पर हवाई यात्रियों को कहा जाता है कि अगर उड़ान के दौरान टर्बुलेंस आए तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उड़ान के दौरान हल्के -फुल्के टर्बुलेंस आते रहते हैं लेकिन मंगलवार को सिंगापुर फ्लाइट एसक्यू321 ने दिखा दिया कि ये टर्बुलेंस कई बार कितने घातक साबित हो सकते हैं। चिंता की बात यह है कि वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे टर्बुलेंस का सामना करने के लिए हवाई यात्रियों को अब ज्यादा से ज्यादा तैयार रहना होगा, क्योंकि जलवायु परिवर्तन का असर विमानों के टर्बुलेंस को बद से बदतर बना रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग जेट स्ट्रीम और अधिक खतरनाक बना रही

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के मौसम विज्ञान विभाग के एक टर्बुलेंस शोधकर्ता इसाबेल स्मिथ ने चेतावनी दी कि ग्लोबल वार्मिंग जेट स्ट्रीम और अधिक खतरनाक बना रही है। गौरतलब है कि जेट स्ट्रीम यानी तेज गति वाली हवा की संकीर्ण धाराओं के साथ ही विमान गति बढ़ाने के लिए उड़ते हैं। टर्बुलेंस की मात्रा जेट स्ट्रीम की गति और वेग से निकटता से जुड़ी हुई है। जैसे-जैसे जेट की गति बढ़ती है, जेट की अस्थिरता बढ़ती है और हवा की रफ्तार काफी बढ़ जाती है, जिससे टर्बुलेंस और अधिक पैदा होता है। एसक्यू 321 को एक विशेष प्रकार के टर्बुलेंस ने प्रभावित किया था, जिसे क्लियर-एयर टर्बुलेंस (सीएटी) कहा जाता है। सीएटी के लिए रिमोट सेंसिंग तरीकों का इस्तेमाल करके हवाई जहाज के ट्रैक का पहले से निरीक्षण करना मुश्किल है और ऐसे में टर्बुलेंस का पूर्वानुमान लगाना भी मुश्किल है। डॉ. स्मिथ के मुताबिक सीएटी हवाओं के कटाव के कारण पैदा होता है। इसलिए इसका जेट स्ट्रीम से गहरा संबंध है।' वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं ने पिछले साल एक पेपर प्रकाशित किया था, जिसमें खुलासा किया गया था कि चार दशकों में गंभीर टर्बुलेंस में 55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि दक्षिणी गोलार्ध की तुलना में उत्तरी गोलार्ध में सीएटी में अधिक वृद्धि हुई है यानी उत्तरी गोलार्ध में गंभीर टर्बुलेंस की संख्या भी बढ़ेगी।