#sehatsudharosarkar: सुविधा तमाम फिर भी SMS अस्पताल का है बुरा हाल, ये खामियां जो मरीजों को रही है परेशान

kamlesh sharma

Publish: Sep, 17 2017 02:03:55 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
#sehatsudharosarkar: सुविधा तमाम फिर भी SMS अस्पताल का है बुरा हाल, ये खामियां जो मरीजों को रही है परेशान

प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल में तमाम सुविधाएं होने के बावजूद यहां मरीजों का दर्द कम नहीं हो रहा।

जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल में तमाम सुविधाएं होने के बावजूद यहां मरीजों का दर्द कम नहीं हो रहा। हर साल अस्पताल का विस्तार किया जाता है। मरीजों का भार कम करने के लिए सरकार व अस्पताल प्रशासन की ओर से कई तरह की योजनाएं बनाई जाती हैं, डॉक्टरों और मरीजों के बीच होने वाले झगड़ों को कम करने के लिए कई तरह के प्रोग्राम चलाए जा रहे हैँ उसके बाद भी स्थिति जस की तस है। चाहे आउटडोर मरीज हो या इनडोर, ऑपरेशन कराने वाले मरीज हो या फिर जांच कराने वाले... सभी का दुखड़ा एक है.... और वो है समय पर उपचार नहीं मिलना।

हाल-ए-एसएमएस अस्पताल
बिस्तर संख्या - 2400
इसकी तुलना में भर्ती रहते हैं एक समय में करीब 3300 मरीज

प्रतिदिन के ऑपरेशन -
छोटे ऑपरेशन - 50
वेटिंग तीन से पांच दिन
बड़े ऑपरेशन - 100
वेटिंग सात से दस दिन

क्षमता - आउटडोर में मरीजों की क्षमता - 4 हजार मरीज
भार - हर रोज आउटडोर में आते हैं - 8 से 9 हजार मरीज

जांच - अस्पताल में हर रोज होती है - 50 से 55 हजार जांचें
आंच - क्षमता से अधिक जांच होने के कारण गुणवत्ता को खतरा

प्रयास- संक्रमण रोकने के किए जाते हैं हर संभव प्रयास
खतरा - मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण बना रहता है संक्रमण का खतरा

सभी वार्ड को मिलाकर होती है हर रोज 20 से 25 मरीजों की मौत

निशुल्क दवा की दुकानों का समय सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक
नियमों के विपरीत बंद कर देते हैं दोपहर 1.30 बजे

एसएमएस अस्पताल उत्तर भारत का सबसे बड़ा अस्पताल है। हर तरह की स्पेशियलिटी यहां मौजूद है। छोटे से लेकर बड़े उपकरण, तीन सीटी स्केन और दो एमआरआई मशीन। दुर्घटना में घायलों के लिए के लिए अलग से ट्रोमा अस्पताल... अन्य लोगों के लिए अलग से इमरजेंसी... अलग से आउटडोर... हर साल अस्पताल का किसी ना किसी रूप में अस्पताल का विस्तार किया जाता है फिर भी मरीजों की सेहद की जब बात आती है तो ढेरों खामियां उजागर होती है।

ये हैं खामियां... जो करी है मरीजों को दुखी
- ठेका प्रथा रहती है अस्पताल पर हावी
- रेजीडेंट डॉक्टरों के भरोसे रहता है अस्पताल
- अस्पताल का सर्वर सिस्टम है कमजोर
- बिना डिग्रीधारी कर रहे हैं जांच, डॉक्टर करवाते हैं बाहर से
- संक्रमण का बना रहता है खतरा

एसएमएस अस्पताल को रेफरल अस्पताल के रूप में बनाने की बात सामने आई। अस्पताल का भार कम करने के लिए सैटेलाइट अस्पतालों में भी सुविधाओं का बढ़ाया या पर कुछ नहीं हुआ। अस्पताल में आने वाले मरीजों को कुत्ते, बिल्ली और बंदरों से भी अपने आप को बचाए रखना पड़ता है। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से इसकी शिकायत की पर कुछ नहीं हुआ। यहां निशुल्क दवा की काफी दुकानों है। आउटडोर मरीजों के लिए इन्हे दोपहर तीन बजे तक खोलना अनिवार्य है पर ये एक बजे बंद होना शुरू हो जाती है... एेसे में आए दिन मरीज झगड़ते दिखलाई देते हैं।

ये सवाल जिनका नहीं है जवाब
- रेजीडेंट की तरह सीनियर डॉक्टर क्यों नहीं रहते राउण्ड दा क्लोक
- रात होते ही वार्ड में सन्नाटा, मरीजों के बुलाने पर भी नहीं आते नर्स-डॉक्टर
- ठेकाकर्मियों का बढ़ रहा है दबदवा, मरीजों से बदसलूकी क्यों
- डॉक्टर मरीजों के झगड़े के बाद क्यों की जाती है हड़ताल

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