JAISALMER NEWS- कभी बुझाता था सबकी प्यास, अब खुद की सांसत में जान!

By: jitendra changani

Published: 12 May 2018, 09:31 AM IST

Jaisalmer, Rajasthan, India

Rajasthan patrika

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सिकुड़ता जा रहा गड़ीसर रेगिस्तान में नखलिस्तान कहलाने वाले इस तालाब का तीन-चार दषक पहले तक जितना विस्तार था, वह आज घट कर आधे से भी कम रह गया है। ग्रामीण क्षेत्रों से बरसाती पानी बहकर निर्बाध रूप से गड़ीसर में पहुंचा करता था, लेकिन वर्तमान में इसके जल प्रवाह क्षेत्र में निरंतर लोग जमीनों पर कब्जे कर आबाद हो रहे हैं। ऐसे में बरसाती पानी की आवक में अड़चनें पैदा हुई है। नियमों के विरुद्ध आगोर क्षेत्र में भी आबादी का रहवास हो गया है तथा कई तरह के निर्माण कार्य कायम हो चुके हैं।

-जर्जर बंगलियों की नहीं ली जा रही सुध
जैसलमेर. जैसलमेर में आज भी वह पीढ़ी मौजूद है, जिसने ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर का पानी पीकर जीवन जीया है लेकिन बदले हालात में यह कलात्मक तालाब स्वयं की सुरक्षा व संवद्र्धन की गुहार लगाता प्रतीत होता है। सैकड़ों साल पुराने इस तालाब की सुंदरता को निहारने आज भी सालाना लाखों देशी-विदेशी सैलानी जुटते हैं और इसकी कलात्मकता के कायल होते हैं। गड़ीसर में पानी के बीचोबीच और किनारे बनी हुई प्राचीन बंगलियों व झरोखों की जर्जरावस्था को सुधारने की दिशा में काम नहीं हो पा रहा तो पानी आवक के रास्ते में होने वाले अतिक्रमणों की तरफ भी किसी का ध्यान नहीं जा रहा।

फैक्ट फाइल -
-1367 में महारावल गड़सी सिंह ने बनवाया यह सरोवर
-’70 के दशक तक पेयजल का था प्रमुख स्रोत
-05 लाख से ज्यादा सैलानी आते हैं प्रतिवर्ष

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