इस साल नगरपरिषद की पहली बैठक में जानिए ऐसा क्या हुआ कि सभापति और विपक्ष के बीच चले भ्रष्टाचार के आरोप

इस साल नगरपरिषद की पहली बैठक में जानिए ऐसा क्या हुआ कि सभापति और विपक्ष के बीच चले भ्रष्टाचार के आरोप

Dharmendra Kumar Ramawat | Publish: Feb, 15 2018 11:05:29 AM (IST) | Updated: Feb, 15 2018 11:08:34 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

नगरपरिषद की साधारण बैठक के अंत तक बजट को छोड़ कर किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बनी

जालोर. नगरपरिषद की साधारण बैठक बुधवार दोपहर करीब 3 बजे टाउन हॉल में सभापति भंवलाल माली की अध्यक्षता में हुई। बैठक की शुरुआत में उपसभपति मंजू सोलंकी ने वित्त कमेटी की बैठक में लिए निर्णय अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट पेश किया। जिसे सर्व सम्मति से पारित किया गया। इसके कुछ समय बाद ही कांग्रेस पार्षद ममता जैन ने सदन को अवगत करवाया कि बैठक के एजेंडे के साथ पार्षदों को बजट की प्रतिलिपि भी देनी चाहिए थी। ताकि इस पर विश्लेषण के बाद पार्षद सदन में अपनी बात रख सकें और नियमानुसार ऐसा प्रावधान भी है। जबकि ऐसा नहीं किया गया। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे में आयुक्त ने बजट को गोपनीय बताते हुए इस तरह का कोई नियम नहीं होने की बात कही। इसी बीच सभापति माली ने पार्षद जैन से कहा कि भ्रष्टाचार आपके कार्यकाल में हुआ है। तभी जनता ने केंद्र से लेकर पंचायतों तक कांग्रेस की सरकार को नहीं बनने दिया। इसके जवाब में पार्षद जैन ने सभापति से कहा कि वे तेरह दिन भ्रष्टाचार के आरोप में जेल रहकर आए हैं। ऐसे में सभी जानते हैं भ्रष्टाचारी कौन है। इधर, आपसी खींचातान के चलते बैठक के अंत तक बजट को छोड़ कर किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बनी। ऐसे में बैठक को बीच में स्थगित करना पड़ा। एजेंडे में वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट पर चर्चा, नगरपरिषद की सीमावृद्धि पर विचार, विभिन्न स्तर पर लीज डीड जारी करने पर विचार, राज्य सरकार की ओर से सीवरेज के लिए आवंटित राशि के उपयोग पर विचार व सेवा से हटाए गए सफाई कर्मचारियों को पुन: सेवा में लेने पर प्रस्ताव लिए जाने थे। बैठक में पार्षद ओमप्रकाश माली, अम्बालाल व्यास, भरत मेघवाल, मानसिंह सिसोदिया, कालूराम मेघवाल, शोभा सुंदेशा, रेखा माली, चंदनसिंह, फूलाराम, सहायक लेखाधिकारी अशोक शर्मा, एईएन परणिता सामरिया व जेईएन शैलेंद्र यादव समेत कई मौजूद थे। मजबूरी थी, नहीं तो ये बैठक भी नहीं होती बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद ममता जैन ने कहा कि बोर्ड के तीन साल के कार्यकाल में 19 बैठकें होनी थी, लेकिन आधी भी नहीं हो पाई। 15 फरवरी को बजट पारित कर भिजवाना था इसलिए बैठक करना मजबूरी था। इसी तरह जैन ने रिक्त पड़े आरआई व राजस्व अधिकारी के पद भरने की बात कही। जिसके लिए आयुक्त सौरभकुमार जिंदल ने सरकार को पत्र लिखने की बात कही। इस बीच सभापति माली का कहना था कि कांग्रेस के बोर्ड में भी ये पद खाली थे। जिस पर पार्षद जैन ने कहा कि बात भाजपा-कांग्रेस की नहीं है, परिषद की आय बढ़ाने पर सभापति को चर्चा करनी चाहिए।

प्याऊ निर्माण पर फिर छिड़ी बहस

बैठक के दौरान पंचायत समिति के पास नाले पर प्याऊ निर्माण के मामले में एक बार फिर वार्ड 29 के पार्षद जितेंद्र प्रजापत व वार्ड 30 के पार्षद हंसमुख नागर के बीच बहस छिड़ गई। इस दौरान प्रजापत का कहना था कि पार्षद ने माता को बुलाकर हंगामा किया। जबकि इस क्षेत्र में पहले से ही तीन प्याऊ बनी हुई है। ऐसे में यहां शौचालय बनना जरूरी है। इस पर पार्षद नागर ने प्याऊ के साथ शौचालय निर्माण भी करवाने की बात कही।

एसबीएम के तहत कार्यों की स्थिति

बैठक में नेता प्रतिपक्ष मिश्रीमल गहलोत ने एसबीएम (स्वच्छ भारत मिशन) की स्थिति के बारे में पूछा। जिस पर आयुक्त जिंदल ने बताया कि परिषद के पास शौचालय निर्माण के लिए कुल 1695 आवेदन आए और वेरिफिकेशन के बाद 297 रिजेक्ट किए गए। वहीं 1388 अप्रूव्ड होने के बाद 1128 शौचालयों का निर्माण हुआ। अभी 130 शौचालय ठेकेदार बना रहा है और 41 निर्माणाधीन हैं। इसी तरह गहलोत ने तीन साल में एमपी-एमएलए फंड से मिली राशि की जानकारी मांगी। जिस पर आयुक्त ने बताया कि एमपी मद से 40 लाख, जबकि एमएलए मद से अब तक साढ़े तीन लाख का बजट मिला है।

देखें नगरपरिषद मीटिंग में हंगामे का वीडियो...

...तो कैसे हो गया शहर ओडीएफ

बैठक में पार्षद हंसमुख नागर ने अधूरे पड़े शौचालय निर्माण को लेकर कहा कि परिषद ने 200 शौचालय निर्माण के टेंडर किए थे और बने सिर्फ सत्तर। इसके बावजूद शहर को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। वहीं शहर में 25-25 लाख के 5 सुलभ शौचालय भी बनने थे जो आज तक नहीं बने। इस पर आयुक्त ने कहा कि 130 शौचालय निर्माणाधीन है और सुलभ शौचालय का मुद्दा ओडीएफ में शामिल नहीं है। अधूरे शौचालय निर्माण को लेकर लोगों को नोटिस दिए और एफआईआर भी करवाई गई।

लगाए सभापति हाय-हाय के नारे

बैठक के अंत में कांग्रेस पार्षद सीट से उठकर सभापति और आयुक्त के सामने आकर खड़े हो गए। साथ ही भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनदेखी को लेकर पार्षदों ने सभापति हाय-हाय के नारे लगाए। इस बीच माइक को लेकर छीना झपटी भी हुई। जिसके बाद बैठक को बीच में ही पूरा कर सभापति, आयुक्त व अन्य भाजपा पार्षद रवाना हो गए।

75 करोड़ का बजट पारित

बैठक में वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए कुल 75 करोड़ 42 लाख 68 हजार का बजट अनुमोदित किया गया। जिसमें प्रारम्भिक शेष 2147.08 लाख, राजस्व आय 2715.60 लाख व पूंजीगत आय 2680 लाख, राजस्व व्यय 3366.56 लाख व पूंजीगत व्यय 3094 लाख निर्धारित किया गया। इसी तरह सीसी सड़कों के निर्माण पर ढाई करोड़, डामर सड़कों पर 1 करोड़, नाले-नालियों के निर्माण पर ढाई करोड़, ग्रेवल-इंटरलॉकिंग सड़क आदि पर 50 लाख, रेलवे क्रॉसिंग से शिवाजीनगर सर्किल तक डिवाइडर व शिवाजी नगर सर्किल से रेलवे स्टेशन रोड तक डिवाइडर पर 1 करोड़, राज्य वित्त आयोग मद से विकास कार्यों पर 2 करोड़, चौदहवें वित्त आयोग मद से 3 करोड़, कार्मिकों के वेतन भत्तों व प्रशासनिक व्यय के लिए 1716.06 लाख का प्रावधान रखा गया।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned