बेमौसम बारिश : खतरे में तीन अरब से ज्यादा का धान, किसानों की बढ़ी चिंता, तिवरा, अलसी, अरहर पर भी असर

सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ी, गली व मोहल्लों में बह रहा नाली का गंदा पानी, बीमारी का खतरा बढ़ा

By: Vasudev Yadav

Published: 25 Feb 2020, 12:23 PM IST

जांजगीर-चांपा. पिछले दो दिनों से लगातार बारिश ने लोगों की समस्या बढ़ा दी है। बेमौसम बारिश से ठिठुरन बढ़ गई है। लोग फिर से आलमारी में रखे स्वटेर व जैकेट को ठंड से बचने के लिए बाहर निकाल लिए हैं। यहां तक कि लोगों को कामकाज में जाने के लिए रेनकोट व छतरी का भी सहारा लेना पड़ रहा है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और मौसम सर्द हो गया है।

मौसम केंद्र रायपुर से मिली जानकारी के अनुसार रविवार को जांजगीर-चांपा का अधिकतम तापमान 31 डिग्री रिकार्ड किया गया था जो सोमवार को 25.0 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान भी गिरकर 14.6 डिग्री पहुंच गया।

खतरे में तीन अरब से ज्यादा का धान

मार्कफेड ने इस साल साढ़े 79 लाख क्विंटल धान की खरीदी की है। धान की बोरियों को संग्रहण केंद्र जांजगीर के किसान राइस मिल, मुनुंद रोड स्थित मनोहर भांठा, सक्ती, अकलतरा और डभरा में रखा गया है। इन सभी संग्रहण केंद्र में सोमवार शाम 61 लाख क्विंटल धान संग्रहण कर लिया गया था।

बेमौसम बारिश : खतरे में तीन अरब से ज्यादा का धान, किसानों की बढ़ी चिंता, तिवरा, अलसी, अरहर पर भी असर

मौसम को देखते हुए मार्कफेड के अधिकारी कैप कव्हर की व्यवस्था में लग गए थे। रविवार को रात में ही झमाझम बारिश शुरू हो गई। मार्कफेड ने आनन-फानन में बोरियों को कैप कव्हर से ढंका। इसके अलावा जिले के सभी 209 खरीदी केंद्रों में भी खुले आसमान में लाखों क्विंटल धान जाम पड़ा है, इसे ढंकने खरीदी प्रभारियों के पास व्यवस्था नहीं है।

डीएमओ सुनील राजपूत का कहना है वर्तमान में 50 से 60 प्रतिशत धान को ढंकने कैप कव्हर की व्यवस्था हमारे पास है। बाकी धान को ढंकने किसी तरह व्यवस्था बनाई जा रही है। हल्की बारिश से धान को खास प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि धान का छिलका मोटा होता है। राजपूत का कहना है अमूमन जून महीने में कैप कव्हर के लिए कवायद की जाती है। बाकी महीने में चिंता नहीं रहती लेकिन बेमौसम हुई बारिश ने परेशानी बढ़ा दी है।

किसानों की बढ़ी चिंता
आफत की बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। रबी फसल में लगे तिवरा, अलसी, अरहर एवं अन्य फसल में इल्ली बढऩे के खतरे से किसान चिंतित दिखाई दिए। किसानों को गेहूं और धान के फसल में कीट प्रकोप का डर सता रहा है। इन दिनों जिले भर में पचास हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में तिवरा अलसी सहित विभिन्न किस्म की फसल लहलहा रही है। इसके अलावा अरहर की फसल भी फल लगी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक-दो दिन की बारिश से कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। आने वाले समय में बारिश नहीं थमने पर फसल को नुकसान हो सकता है।

इसलिए हुई बारिश
मौसम विभाग के अनुसार उत्तरी पाकिस्तान व इससे सटे अफगास्तिान के पास ऊपरी हवा का चक्रवात घेरा बना हुआ है। जिसके कारण हरियाणा के ऊपर चक्रिय चक्रवाती चक्र बना हुआ है। इसके कारण पिछले दो दिनों से झमाझम बारिश के साथ कई जगह ओले गिरे। मंगलवार से बादल छंटने लगेंगे।

Vasudev Yadav
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