सड़क पर घिसट कर चल रहा था जीवन, कोई नहीं था पूछने वाला अब इन्होने बढ़ाया हाथ तो खिल उठे चेहरे

Intellectual Disability: प्रशासन, दानदाता और स्वयंसेवी संगठन नहीं ले रहे मानसिक रोगियों की सुध, जिले की मिशन संस्था डॉन बास्को के 25 लोगों की टीम मानसिक रोगियों को नया जीवन देने का कर रही काम

By: Saurabh Tiwari

Updated: 05 Sep 2019, 11:45 AM IST

जशपुरनगर. (Intellectual Disability) जशपुर जिले में स्वयंसेवी संगठन और दानदाताओं की लम्बी कतार होने के बाद भी यहां के विभिन्न कस्बों की सडक़ों पर भटक रहे विक्षिप्तों को नया जीवन देने के लिए एक मात्र ईसाई मिशनरी संस्था इस नेक काम को करने मे जुटी हुई है। कुनकुरी के समीप रायडीह गांव में डॉन बास्को संस्था में फादर जोसेफ डिसूजा के साथ 25 लोगों की टीम मंदबुद्धि और मानसिक रोगियों की रात दिन सेवा कर उन्हें नया जीवन देने की खातिर कड़ी मशक्कत कर रही है। इस संबंध में पत्रिका से चर्चा करते हुए समाज सेवी जोसेफ डिसूजा ने कहा कि मानसिक रोगी और मंदबुद्धि लोगों के प्रति सद्भावना रखने के साथ उनका समय पर उपचार की पहल हो जाने से उन्हें नया जीवन दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नियमत: पुलिस की भी जिम्मेदारी होती है कि वह विक्षिप्तों को मेंटल हास्पिटल भेज कर उन्हे नया जीवन दिलाने में सहयोग देवे लेकिन शहर में विक्षिप्तों का जीवन कूड़े के ढ़ेर और सडक़ों पर ही घिसट रहा है।

दरअसल जिले के ग्रामीण और शहरी अंचल में जगह जगह विक्षिप्त दिख जाते हैं। कोई इन्हे देख कर हमले की आंशका से भागने में ही भलाई समझता है तो कोई इनकी भूख को देख कर खाने पीने की सामग्री भी दे देता है, लेकिन इन विक्षिप्तों की दशा सुधारने के लिए किसी ने भी सार्थक पहल नहीं की है। कुनकुरी क्षेत्र में ईसाई मिशनरी व्दारा संचालित डॉन बास्को सेवा भावी संस्था व्दारा विक्षिप्तों को अपने संस्थान में रख कर इलाज करने के अलावा जटिल रोगियों को रांची मेंटल हास्पिटल भेजने का अवश्य बीड़ा उठाया है पर इस काम में अन्य लोगों का सहयोग नहीं मिल पाने से सीमित मरीजों को ही मानसिक चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल पा रहा है।

बेहद जरूरी है मनोरोगी का समय पर इलाज : जशपुर जिले में पत्थलगांव सिविल अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञ डा. पी सुथार का कहना था कि वास्तव में परिवार के लोग अपनी जिम्मेदारी से विमुख हो रहे हैं। यही वजह है कि घर के सदस्य गांजा, शराब तथा अन्य नशा के आदी हो रहे हैं। तनाव भी लोगों में विक्षिप्तता का प्रमुख कारण है। इसलिए रोगी में विकार बढऩे से पहले उपचार में ध्यान देना चाहिए। डा. सुथार का कहना था कि वास्तव में हमें विक्षिप्त व्यक्ति के प्रति सहानुभूति अपनानी चाहिए। उन्होने कहा कि मनोरोगी किस सीजन में बढ़ते हैं, इसका कोई शोध परक प्रमाण तो नहीं है। पर इनके बढऩे का बड़ा कारण नशा व बेवजह तनाव की अधिकता है। ऐसे रोगी का इलाज कराने में परिवार के लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

मदद के लिए सामने नहीं आ रहे लोग व संस्थाएं : जिले के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं प्रमुख समाज सेवी मुरारीलाल अग्रवाल का कहना है कि हमारे दान दाताओं व्दारा आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रम के मंच से कई बार सेवा भावना के कार्यो में ऐसे बेसहारा लोंगो की मदद लेने की पेशकश तो की जाती है लेकिन मानसिक रोगी और मंदबुद्धि के मरीजों की सेवा का थोड़ा जटिल काम होने से इस ओर ठोस पहल नहीं हो पाई है। जशपुर जिले में विक्षिप्तों की निरंतर बढ़ती जनसंख्या के बाद भी इस दिशा में अभी तक कोई ठोस प्रयास नहीं हो पाने से ज्यादातर विक्षिप्त सडक़ों पर घिसट कर अपना जीवन व्यतित कर रहे हैं। इन विक्षिप्तों के जीवन में बदलाव की बात मात्र चिंतन बैठक तक ही सीमित रह गई है।

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