लॉकडाउन को तोड़कर सैकड़ों लोग पैदल पहुंच रहे गांव, संक्रमण की आशंका बढ़ी

ठेकेदार ने सभी को दो दिन की मजदूरी देकर लौटने को कहा, साढ़े सात हजार रूपए नहीं दिए, घर से पैसा ले गए थे अब वह भी खर्च हो गया, भोजन के लिए पैसे नहीं

झाबुआ. गुजरात -राजस्थान से हजारों की तादात में लौट रहे मजदूर खतरे की घंटी बजा रहे हैं। इनका बॉर्डर पर चेकअप नहीं हो रहा। मजदूरों के जत्थे के जत्थे पैदल जिले में पहुंच रहे हैं। गुरुवार को एक परिवार के 17 सदस्य अंकलेश्वर से उदयगढ़ जाने निकले। इसमें 6 बच्चे थे। सभी लोग अंकलेश्वर में पांच घंटे इंतजार के बाद बड़ौदा एसटी बस से पहुंचे। वहां से पुलिस ने एक ट्रक में बैठाया। ट्रक ड्राइवर ने फूलमाल छोड़ा। वहां से पैदल चलकर उदयगढ़ जाना है। दो दुध मुंहे बच्चों को लेकर महिला पैदल चल रही थी।

परिवार के मुखिया मनसुख ने बताया कि पांच दिन पहले परिवार सहित गुजरात मजदूरी पर गया था। गुरुवार सुबह से किसी ने कुछ नहीं खाया। पीने का पानी भी नहीं। सभी दुकानें बंद है। कहीं कुछ नहीं मिल रहा। इस साल दो भाई राहुल और सुनील की शादी हुई। कर्ज के कारण चारों भाई अपनी पत्नी और बच्चों के साथ काम की तलाश में गुजरात गए। 19 मार्च को गुजरात के अंकलेश्वर में परिवार के 8 लोगों को काम मिला। दो छोटी बहन एक छोटा मिलकर सभी छोटे बच्चों को संहालते और हम काम करते। ठेकेदार ने सभी को दो दिन की मजदूरी देकर लौटने को कहा। साढ़े सात हजार रूपए नहीं दिए। घर से जो पैसा ले गए थे। अब वो भी खर्च हो गया। खाने के पैसे भी नहीं। इसके बाद राजगढ़ नाके पर समाजसेवकों ने पूरे परिवार को भोजन कराया। परिवार उदयगढ़ के लिए पैदल निकला।
यात्री बसों व अन्य वाहनों की आवाजाही पर रोक लगने के बाद मजदूरी के लिए गुजरात व राजस्थान गए ग्रामीण पैदल परिवार के साथ अपने गांव पहुंच रहे हैं। यदि इनमें से एक-दो परिवार भी कोरोना संक्रमित निकले तो मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

पूरे गांव में संक्रमण फैलने का खतरा
गुजरात और राजस्थान से आने वाले ऐसे ग्रामीण सड़क से आ रहे हैं। उनकी तो स्क्रीनिंग हो जाएगी, लेकिन जो लोग कच्चे रास्तों और पगडंडियों से होते हुए गांव में पहुंच गए उनके लिए प्रशासन के पास कोई योजना नहीं है। उनका पता नहीं चल पाएगा। ऐसे में प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। यदि कहीं संक्रमित व्यक्ति आ गया तो पूरे गांव में संक्रमण फैलने का खतरा खड़ा हो जाएगा।

4 हजार से अधिक मजदूर अपने घर पहुंचे
जिस तरह से सीमावर्ती गुजरात व राजस्थान से मजूदर का प्रवेश हमारे जिले में हो रहा है। उससे कोराना वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालातों में प्रदेश की सीमा पर 15 दिन का आइसोलेशन कैंप लगाया जाना चाहिए। क्योंकि कोविड-19 के इनक्यूबेशन पीरियड के हिसाब से उसके लक्षण नजर आने में 7 से 14 दिन लग सकते हैं। इन दिनों जितने भी मजदूर लौट रहे हैं उनकी सर्दी-खांसी और बुखार की जांचकर उन्हें घर रवाना किया जा रहा है। केवल स्क्रीनिंग के आधार पर ही 4 हजार से अधिक मजदूर अपने घर पहुंच चुके हैं। यदि घर पहुंचने के बाद उनमें कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ तो ऐसे में ये मजदूर न केवल अपने परिवार और गांव बल्कि पूरे जिले के लिए नया खतरा बन जाएंगे।

kashiram jatav
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