सूखी नदी में दिन-रात अवैध खनन, पत्थरों को खोदकर ट्रैक्टरों से ले जा रहे कारोबारी

दिनभर अलग-अलग स्थानों पर नदी के पत्थरों को किया जा रहा इकट्ठा

झाबुआ. अवैध रेत परिवहन जिले में लगातार जारी है। इससे राजस्व को तो लाखों रुपए की चपत लग रही है। साथ ही सड़कें भी ओवरलोड से जर्जर हो रही हैं, लेकिन अधिकारी किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने का मन बना चुके हैं। इसी कड़ी में जिला मुख्यालय से महज 2 किमी दूर अवैध खनन अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है।

प्रकृति संरक्षण के लिए प्रशासन द्वारा चलाए जाने वाले जागरूकता अभियान और दावों की पोल खोलता नदी का दृश्य किशनपुरी बैराज का जलस्तर गिरने के बाद का है। इन दिनों नदी के बड़े क्षेत्रफल में पानी नहीं है। इस कारण अवैध खनन कारोबारी बेखौफ दिन में ही खनन कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार लंबे समय से इन पर कोई कार्रवाई नहीं होने से अंचल में अवैध खनन को बढ़ावा मिला है। मवेशियों के लिए नदी के बड़े-बड़े गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे
पानी की तलाश में आए मवेशियों के लिए नदी के बड़े-बड़े गड्ढे जान लेवा साबित हो रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर गांव वालों ने बताया रोजाना अनगिनत ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर नदी के पत्थरों को निर्माण कार्यों में उपयोग करने के लिए ले जाया जा रहा है। कुछ लोग इससे निर्माण कार्य कर रहे हैं तो कुछ लोग इसे ठेकेदारों को बेच रहे हैं। इस संबंध में खनिज निरीक्षक शंकर सिंह कनेश का कहना है कि अवैध खनन पर कार्रवाई की जाएगी।

खनन से बन चुके हैं बड़े-बड़े गड्ढे
पिपलिया और धर्मपुरी के बीच अनास नदी पर जगह जगह से खनन किया जा रहा है। दिनभर अलग-अलग स्थानों पर नदी के पत्थरों को इक_ा किया जा रहा है। नदी एवं पहाड़ खोदने का सिलसिला सालों से यूंही चल रहा है। समय पर इसकी शिकायत भी कि जाती है, लेकिन जिम्मेदारों पर कोई असर नहीं। नदियों में लगातार हो रहे खनन से बड़े-बड़े गढडे बन चुके हैं।

kashiram jatav
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned