मेरा बेटा बच गया
भवानीमंडी निवासी खलीलभाई ने बताया कि उनका एक ही शादाब हुसैन 20 वर्ष है।जिसे डेंगू होने से एसडीपी की बहुत ज्यादा जरुरत थी। लेकिनकिट नहीं होने से नहीं मिल पाई। ऐसे में इमरान, नोशिन मेम, कासिम आदि को मालिक ने फरिश्ते के रुप में भेजा इमरान आदि ने रक्तदान किया, इनकी वजह से मेरा बेटा बच गया। सरकारी अस्पताल में किट आदि की व्यवस्था नहीं होने से बहुत परेशानी आ रही है। यहां एक मशीन की ओर जरुरत है।