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महिला और बालिकाओं की परेशानी में अब मददगार होगी सुरक्षा सखी

- जिले के 27 थानों में लागू होगी योजना

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Security friend will now be helpful in the problems of women and girls

महिला और बालिकाओं की परेशानी में अब मददगार होगी सुरक्षा सखी

हरिसिंह गुर्जर
झालावाड़. महिलाओं व बालिकाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस मुख्यालय नई योजना शुरू करने जा रहा है। योजना के तहत उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने एवं समस्याओं का समाधान करने के लिए नई पहल शुरू की जा रहा है। अब जिले के सभी 27 थानों में महिलाओं की मदद के लिए सुरक्षा सखी विंग होगी जो महिलाओं की समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण कराएगी। सुरक्षा सखी विंग की सदस्य कोई भी महिला व बालिका जिनकी उम्र 15 से 70 वर्ष होगी स्वैच्छा से बन सकेगी।
सुरक्षा सखी विंग की हर माह थानाधिकारी बैठक लेंगे, जिसका पर्यवेक्षक वृत्ताधिकारी करेंगे। पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर ने इस संबंध में हाल में जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र जारी कर योजना को लागू करने के लिए कहा है। पत्र मिलने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक झालावाड़ ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है।
पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार प्रत्येक थाने में सुरक्षा सखी का समूह थानाधिकारी की आरे से जिम्मेदारी पूर्वक निर्धारित किया जाएगा। हर माह थानाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक होगी। सुरक्षा सखी योजना का नोडल ऑफिसर प्रत्येक थाने में महिला अधिकारी-कर्मचारी को बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी का मोबाइल नंबर प्रत्येक सुरक्षा सखी सदस्य के पास होगा। सुरक्षा सखी की बैठक के लिए अलग से रजिस्टर भी संधारण किया जाएगा। बैठक में उठाए गए मुद्दो, शिकायत एवं उनके निवारण का उल्लेख अंकित किया जाएगा। जिले में पदस्थापित वृत्ताधिकारी हर माह सुरक्षा सखी समूह की थानाधिकारी की ओर से ली जाने वाली बैठक की मॉनिटरिंग करेंगे। साथ ही सुरक्षा सखी योजना की संपूर्ण जिम्मेदारी के लिए अलग से एक प्रभारी भी बनाया जाएगा।

दस्य बनने के लिए ये होगी योग्यता-
- सदस्य बनने वाली महिला व बालिका संबंधित थाना क्षेत्र की निवासी हो।
- सदस्य की आयु 15 से 70 वर्ष के बीच हो।
- सदस्य बनने वाली बालिका व महिला का किसी तरह का आपराधिक रेकॉर्ड न हो और न ही किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि में लिप्त हो।

सखी का कार्य हर तरह की घटना से पुलिस को अगवत करना होगा-
सुरक्षा सखी का मुख्य काम महिलाओं- बालिकाओं और पुलिस के बीच संवाद स्थापित कर दूरी को कम करने का प्रयास, किसी अप्रिय व्यवहार एवं घटनाओं तथा छेड़छाड़, दुव्र्यहार के बारे में स्थानीय पुलिस को सूचित करना, महिलाओं-बालिकाओं की समस्याओं की जानकारी कर पुलिस के साथ मिलकर समाधान कराना। संदिग्ध व्यक्तियों के आवागमन, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीडऩ, बाल-विवाह,गुमशुदा बच्चियों, मादक पदार्थों के सेवन और स्कूल-कॉलेज में किसी प्रकार की अवांछनीय गतिविधियों से पुलिस को अवगत कराना है।

ये बन सकेंगी सदस्य-
- सुरक्षा सखी की खुली सदस्यता होगी जिसमें कोई भी इच्छुक महिला-बालिका सदस्य बन सकेगी।
- प्रत्येक वर्ग, धर्म, जाति व समुदाय की महिलाओं व बालिकाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
- आशा सहयोगिनी, एएनएम, जीएनएम एवं आंगनबाडी कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन एवं विभिन्न सरकारी विभागों की महिलाओं जैसे शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य, समाज कल्याण विभाग, विद्युत जलदाय, एवं राजस्व आदि की भी सुरक्षा सखी के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।
- महिला शक्ति आत्मरक्षा केन्द्र योजना के तहत प्रशिक्षित बच्चियों व महिलाओं को शामिल किया जाएगा।

जिले में 27 थानों में लागू होगी योजना-
महिला सखी सखी योजना को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई हैएजिले के सभी 27 थानों में योजना शीघ्र लागू की जाएगी इसके माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाएंगे! इसकी हर माह समीक्षा बैठक आयोजित कर मॉनिटरिंग की जाएगी! हर थाना स्तर पर एसएचओ इसमें कार्य करेंगे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं समूह में सदस्य बनाई जाएगी!
राजेश यादव, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक झालावाड़