कंवरपुरा के लोगों से प्रेम की ऐसी बंधी डोर की इन्हें देखते ही उड़कर पास आ जाते हैं पक्षी

कंवरपुरा के लोगों से प्रेम की ऐसी बंधी डोर की इन्हें देखते ही उड़कर पास आ जाते हैं पक्षी

manish mishra | Publish: Jan, 14 2019 10:08:12 PM (IST) Jhunjhunu, Jhunjhunu, Rajasthan, India

चिड़ावा. मकर संक्रांति यानी दान कर पुण्य कमाने का दिन। इस दिन लोग जरुरतमंदों की मदद करते हैं, ताकि पुण्य मिल सके।

चिड़ावा. मकर संक्रांति यानी दान कर पुण्य कमाने का दिन। इस दिन लोग जरुरतमंदों की मदद करते हैं, ताकि पुण्य मिल सके। इसी कड़ी में खुडाना पंचायत के कंवरपुरा गांव के लोग पक्षी प्रेम की अनूठी मिशाल कायम कर रहे हैं। दरअसल, यहां हर साल मकर संक्रांति पर करीब 30-35 क्विंटल अनाज एकत्र किया जाता है। युवाओं की टोलिया गांव में घर-घर जाकर पक्षियों के लिए अनाज एकत्र करती हैं। यह परंपरा सालों-साल से चली आ रही है। जिसका कारवां बढ़ता जा रहा है।

एकत्र अनाज को गांव के पास बने बाबा नत्थूराम की कुटियां में भेंट करते हैं। जिसे रोज पक्षियों को डाला जाता है। ग्रामीण बताते हैं, मंदिर के बाहर चुग्गे के लिए रोज हजारों पक्षी आते हैं। रोज करीब एक क्विंटल अनाज पक्षियों को चुग्गे के लिए डाला जाता है। जिसमें पड़ोसी गांव बख्तावरपुरा, विजयपुरा व आस-पड़ौस के अन्य ग्रामीणों का पूरा सहयोग रहता है। ग्रामीणों की इस पक्षी प्रेम से दूसरे लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।

हर साल 300 क्विंटल से ज्यादा
गांव की सीमा पर स्थित बाबा नत्थूराम की कुटियां पर सालाना करीब तीन सौ क्विंटल अनाज पक्षियों को डाला जाता है। जिसमें ग्रामीणों का पूरा सहयोग रहता है। कंवरपुरा गांव के युवा मकर संक्रांति पर घर-घर जाकर अनाज, घी एकत्र करते हैं। घी को मंदिर में ज्योत में काम में लिया जाता है। गांव से हर साल करीब 30-35 क्विंटल अनाज, 20-25 किलो देशी घी एकत्र होता है।

पड़ौसी गांव का भी सहयोग
पक्षियों के चुग्गे में बख्तावरपुरा, विजयपुरा के लोग भी सालाना अनाज पहुंचाते हैं। वहीं मुगी फार्म संचालक भी इच्छानुसार हर साल अनाज भेंट करते हैं। ग्रामीण किसान फसल निकलने पर मन मुताबिक अनाज देते हैं। जिसे रखने के लिए मंदिर में गोदाम बना है।

करीब नौ दशक पुराना मंदिर
कंवरपुरा-विजयपुरा व बख्तावरपुरा की सीमा पर बाबा नत्थूराम का मंदिर करीब नौ दशक पुराना बताया जा रहा है। किवदंतियों के अनुसार यहां बाबा नत्थूराम दुर्गा मैया की भक्ति में लीन रहते थे। करीब नौ दशक पहले बाबा ने जीवत समाधी ली थी। तब से मंदिर में हर साल बाबा की पुण्यतिथि मनाई जाती है। जिसमें भजन-भाव, यज्ञ होता है। महंत सीताराम आठ-दस साल से मंदिर में रहते हंै।

इनका कहना है-
पक्षियों के लिए हर साल अनाज एकत्र किया जाता है। ऐसा करीब 10-12 साल से किया जा रहा है। जिसमें ग्रामीण पूरा सहयोग देते हैं।
कपिल कटेवा कासी, पंच, कंवरपुरा

रोज करीब हजारों पक्षी चुग्गे के लिए आते हैं। जिसके लिए ग्रामीण पूरा सहयोग देते हैं। ऐसा लंबे समय से चलता आ रहा है।
कै.रामपत कटेवा, ग्रामीण

मकर संक्रांति पर घर-घर जाकर अनाज एकत्र किया जाता है। गत वर्ष करीब 30 क्विंटल अनाज एकत्र किया गया था। इस साल भी अनाज एकत्र करेंगे।
धर्मपाल सिंह, ग्रामीण

मंदिर में पक्षियों के लिए ग्रामीण हर साल अनाज एकत्र करते हैं। किसान व मुर्गी फार्म संचालक भी अनाज भेंट करते हैं। रोज करीब एक क्विंटल अनाज डाला जाता है।
संजीव कटेवा, ग्रामीण

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