राजस्थान सरकार के इस पूर्व मंत्री को भी मिला था मोटा प्रलोभन

मैं उस समय निर्दलीय विधायक था। मुझे भी प्रलोभन दिए गए। मैं किसी लालच में नहीं आया। मुझे भैंरोसिंह सरकार के कार्य से संतुष्टि थी। मैंने स्वेच्छा से सरकार का समर्थन किया। जिससे सरकार गिरने से बच गई थी। बाद में मुझे ईमानदारी का ईनाम भी मिला। निर्दलीय होने के बावजूद मंत्री पद दिया गया।

By: Rajesh

Published: 20 Jul 2020, 12:20 PM IST


सुरेन्द्र डैला
चिड़ावा (झुंझुनूं). करीब छह दशक तक राजनीति में सक्रिय रहे सात बार के राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी व सूरजगढ़ के पूर्व विधायक सुंदरलाल राज्य सरकार के वर्तमान हालात को ठीक नहीं मानते। उनका मानना है कि कांग्रेस में सदैव ही गुटबाजी हावी रही है। कांग्रेस में सिर्फ कुछ लोगों की ही चलती है। जिस कारण यह हालात बन रहे हैं। घर की लड़ाई सड़क पर आ चुकी है। कांग्रेस की कलह का आमजन को भी हर्जाना भुगतना पड़ रहा है। जनता के काम नहीं हो रहे। पेश है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश...।

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सवाल : प्रदेश में वर्तमान में चल रही राजनीतिक उठा-पटक को लेकर क्या कहेंगे?
जवाब : राजनीतिक लिहाज से अच्छा नहीं हो रहा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने मंत्रियों को पद तो दे दिए, मगर उनका काम नहीं होने दिया। जिस कारण वे भी तंग आ गए। पंचायतीराज मंत्री को बिना विश्वास में लिए ही चुनाव टाल दिए। यही वजह है कि कांग्रेस को कांग्रेस से ही लडऩा पड़ रहा है।
सवाल : भाजपा पर सौदेबाजी के आरोप लग रहे हैं, क्या यह सही है?
जवाब-नहीं, कांग्रेस से खुद का घर ही नहीं संभल रहा। भाजपा का इस मामले में कोई लेना-देना नहीं है। वे भाजपा पर आरोप लगाकर ध्यान भटकाना चाहते हैं। खुद पायलट भी कह चुके हैं कि वे भाजपा में नहीं जाएंगे। ऐसे में सौदेबाजी कैसे हो सकती है? यह तो वही बात हुई कि मरे बीमारी से नाम भगवान का करें।

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सवाल : भाजपा में भी गुटबाजी की चर्चा होती रहती है, आपकी नजर में सही क्या है?
जवाब : भाजपा में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है। सब एकजुट हैं। यहां फैसले सब की राय-मशविरा के बाद लिए जाते हैं। कांग्रेस की तरह दो-तीन लोग फैसले नहीं लेते।
सवाल : भैंरोसिंह सरकार के समय भी ऐसे ही हालात बने थे। उस समय भी क्या सौदेबाजी होती थी?
जवाब : मैं उस समय निर्दलीय विधायक था। मुझे भी प्रलोभन दिए गए। मैं किसी लालच में नहीं आया। मुझे भैंरोसिंह सरकार के कार्य से संतुष्टि थी। मैंने स्वेच्छा से सरकार का समर्थन किया। जिससे सरकार गिरने से बच गई थी। बाद में मुझे ईमानदारी का ईनाम भी मिला। निर्दलीय होने के बावजूद मंत्री पद दिया गया।

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सवाल : आप भी कांग्रेस में रह चुके हैं, उस समय पार्टी क्यों छोड़ी?
जवाब : कांगे्रस की रीति-नीति सदैव छलवादी रही है। इस पार्टी में केवल दो परिवारों का आशीर्वाद चाहिए। जिसके बिना आगे नहीं बढ़ सकते। मुझे कांग्रेस की रीति-नीति पसंद नहीं आई। इसलिए छोड़ दी।
सवाल : सचिन पायलट के कदम को क्या आप सही मानते हैं?
जवाब : कांगे्रस सरकार बनाने में सचिन पायलट का पूरा योगदान रहा। उसके बावजूद उसके साथ सीएम गहलोत ने सौतेला व्यवहार किया। उप मुख्यमंत्री पद देने के बावजूद काम नहीं किए। जिससे पायलट घुटन महसूस करने लगा। तंग आकर ऐसा फैसला लेना पड़ा। कोई भी विरोध तभी करता है, जब उसकी सुनवाई नहीं होती या उसके साथ पक्षपात होता है।
सवाल : आपके कार्यकाल में भी बाड़ाबंदी होती थी?
जवाब : बाड़ाबंदी तो सदैव ही होती रही है। मगर इतने दिनों तक ऐसी अस्थिरता नहीं देखी। एक-दो दिन में सरकार का फैसला हो जाता था। इस सरकार में तो हद ही हो गई।
सवाल : वर्तमान हालत को देखते हुए आपको लगता है कि सरकार बच पाएगी?
जवाब : मुश्किल है। यह तो विधायकों को बाड़ाबंदी कर रोक रखा है। अगर बाड़ाबंदी नहीं होती तो बहुत से विधायक ढूंढने से नहीं मिलते।

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