
झुंझुनूं। झुंझुनूं शहर के निकटवर्ती गांव दोरासर स्थित सैनिक स्कूल में शिक्षक की ओर से 12 बच्चों से कुकर्म ( Sexual Assault Case in Jhunjhunu ) करने के मामले में पुलिस अनुसंधान ( Sainik School Teacher Molesting ) जारी है। राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल की अध्यक्षता में आज बोर्ड की विशेष बैठक बुलाई गई है। दोपहर 12 बजे से दो बजे तक चलने वाली बैठक में झुंझुनूं में जांच करने आई आयोग की टीम अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। जिसपर चर्चा के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा। शनिवार को मामले की जांच करने पहुंची सैनिक स्कूल सोसायटी की टीम ने रविवार को मामले में छानबीन की।
एक के बाद एक खुल रही कई परतें ( Molesting in School )
पुलिस की जांच के दौरान बच्चों से कुकर्म करने के मामले में एक के बाद एक कई परतें खुल रही हैं। पुलिस जांच में दो महीने के खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है कि आरोपी शिक्षक रविंद्रसिंह ने दो महीने के दौरान आठ बच्चों को अपने कमरे में बुलाया था। यह मामला होने के बाद कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल से छुट्टी दिलाकर ले गए। वहीं स्कूल में बच्चों की काउंसलिंग के लिए कोई काउंसलर तक नहीं था। आरोपी खुद सीनियर हाउस मास्टर था। इसके अलावा चार हाउस मास्टर थे जो सीनियर हाउस मास्टर के अधीन कार्य करते थे। वह श्किायत करने वाले बच्चों को लोहे की रॉड से पीटता था। राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने जांच में यह तथ्य माना है।
बच्चों ने बताई आपबीती
वहीं बच्चों ने आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल को आपबीती बताई। बच्चों ने बताया कि शिक्षक डराकर रखता था। स्कूल में हॉस्टल और आवास बिल्कुल सटे हुए हैं, जिसमें एक रास्ता होस्टल से सीधे शिक्षक के आवास पर जाता था और दूसरा रास्ता घूमकर। ऐसे में मास्टर होस्टल से बच्चों को आवास वाले सीधे रास्ते से बुलाता था। इस बात का अन्य स्टाफ को पता था, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
टीम दोरासर स्थित सैनिक स्कूल पहुंची और सभी पीडि़त बच्चों की अलग-अलग बातचीत की तो सामने आया कि आरोपी शिक्षक रविंद्र बच्चों का कॅरियर खराब करने की धमकी देने के साथ-साथ मारपीट भी करता था। जेल जाने का डर दिखाता था। कई बार वह शिकायत पेटी को ही घर ले जाता था।स्कूल में लंबे समय से सीपीएमसी की बैठक नहीं हुई।टीम उप निदेशक पवन पूनियां के निर्देशन में पीडि़त बच्चों की काउंसलिंग के लिए पहुंची। जांच में यह भी सामने आया है कि स्कूल में काउंसलर नहीं होने से बच्चे अपनी पीड़ा बता नहीं सके।
Updated on:
16 Dec 2019 09:14 am
Published on:
16 Dec 2019 09:12 am
