झुंझुनूं के अजीतगढ़ गांव में थी राजाओं के जमाने की जेल और तहसील

तहसील के मुख्य गेट पर निर्माण करते समय चेजारों ने ही अजीतगढ़ तहसील का नाम किया था। इस दरवाजे पर आज भी अजीतगढ़ तहसील होने का साक्ष्य मौजूद है। गांव के 92 वर्षीय सेवानिवृत शिक्षक शंकरलाल शर्मा ने बताया कि गढ़ में तहसील कार्यालय चलता था। तहसीलदार, कानूनगो, सहित अन्य राज के कर्मचारी बैठते थे।

By: Rajesh

Published: 10 Aug 2020, 10:15 PM IST

मंडावा.राजस्थान के झुंझुनूं जिले के अजीतगढ़ गांव में आजादी से पहले पुलिस थाना, तहसील व जेल तक थी। अब इस गांव में उप तहसील व पुलिस की चौकी तक नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में चूड़ी अजीतगढ़ नाम वाले गांव से खेतड़ी के तत्कालीन राजा अजीतसिंह का विशेष लगाव था। उन्होंने यहां तहसील, थाना, जेल व प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भवनों का निर्माण करवाया था। राज दरबार ने गांव को प्रशासन का केन्द्र बनाया था। इसी दौरान सेठ शिवनारायण नेमानी ने गांव में स्कूल, अस्पताल, धर्मशाला, कुआं, आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई। फिर ब्रिटिश शासन के पश्चात स्वतंत्र भारत में प्रशासनिक सिस्टम बदल गया। अनेक कस्बों में नई तहसील, थाना, कोर्ट, कचहरी सहित अनेक सरकारी कार्यालय खुलेे। लेकिन यहां के तहसील कार्यालय, थाना, जेल, अधिकारी के आवास सहित बाजार की दुकानें व व्यापार मंडी सब बंद हो गए। वर्तमान में अजीतगढ़ सिर्फ ग्राम पंचायत कार्यालय तक सीमित हो गया।

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अजीतगढ़ तहसील में थे 36 गांव
करीब एक सौ तीस साल पहले गढ़ के मॉडल में बनी तहसील के चारों कोनो पर चार बुर्ज व मध्य में बड़ा हाल व कमरे हैं। तहसील के मुख्य गेट पर निर्माण करते समय चेजारों ने ही अजीतगढ़ तहसील का नाम किया था। इस दरवाजे पर आज भी अजीतगढ़ तहसील होने का साक्ष्य मौजूद है। गांव के 92 वर्षीय सेवानिवृत शिक्षक शंकरलाल शर्मा ने बताया कि गढ़ में तहसील कार्यालय चलता था। तहसीलदार, कानूनगो, सहित अन्य राज के कर्मचारी बैठते थे। इस तहसील में अंर्तगत सिंगनौर तक के 36 गांव थे। शर्मा कुछ तहसीलदारों को तो नाम सहित अच्छी तरह जानते हैं। तहसील के पास पुलिस थाना व जेल भी बनाई थी। पुलिस थाना में कोतवाल बैठता था। अपराधियों को जेल में डाल सजा दी जाती थी। अजीतगढ़ तहसील के गांवों को झुंझुनूं व उदयपुरवाटी तहसील में शामिल कर दिए।

अजीतगढ़ मंडी में थी 84 दुकान
कस्बे की मंडी प्रसिद्ध थी। सामान खरीदने व बेचने के लिए भी लोग यहां आया करते थे। मंडी में सामान बेचने व खरीदने के लिए 84 दुकानों का बाजार था। धीरे-धीरे पुराना बाजार मंडी सब खत्म हो गया। पुराना बाजार की अधिकांश दुकाने क्षतिग्रस्त हो गई। कुछ को तोड़करआवास में शामिल कर लिया।

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राज का मंदिर व राज का कुआं
तहसील भवन के उत्तर दिशा में खेतड़ी राजा ने सबसे पहले गांव में मंदिर व कुएं का निर्माण करवाया था। जिसको लोग आज भी राज का कुआं व राज का मंदिर कहते हैं। इस संबंध में पवन कुमार शर्मा ने बताया कि अजीतगढ़ के मंदिर में खेतड़ी दरबार ने अष्ठधातु की मूर्तियां स्थापित की थी। जिन्हें चोर ले गए। खुलासा आज तक नहीं हुआ।

उप तहसील मंडावा व थाना मुकुंदगढ़ के अधीन हो गया

अजीतगढ़ तहसील बंद होने के बाद गांव को झुुंझुनूं तहसील में शामिल किया गया था। बाद में मंडावा उप तहसील बनने के पश्चात वर्तमान में अजीतगढ़ गांव झुंझुनूं तहसील से हटाकर उप तहसील मंडावा में शामिल कर दिया है। अजीतगढ़ का थाना बंद होने के गांव को मंडावा थाने के अधीन शामिल किया गया। फिर मुकुंदगढ़ पुलिस चौकी को थाना बनाने पर अजीतगढ़ को मंडावा से हटाकर मुकुंदगढ़ थाना का गांव बना दिया।

Rajesh Desk/Reporting
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