
माचिया में टूटा टाइगर का मचान जलकुण्ड भी सूखे
नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. माचिया बॉयोलॉजिकल पार्क में टाइगर, लॉयन सहित केट प्रजाति के सभी वन्यजीवों को न तो प्राकृतिक वातावरण मिल रहा है और ना ही पिंजरों में साफ सफाई, स्वच्छ फिल्टर पानी व जंगल जैसा वातावरण नसीब हो पा रहा है। केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण (सीजेडए) के तय मानदंड व जारी गाइडलाइन के अनुसार वन्यजीवों को खुराक तय होने के बावजूद लंबे अर्से से नहीं मिल पा रही है। वन्यजीवों व प्रकृति से जुड़े अनूठे संसार देखने के लिए माचिया जैविक उद्यान आने वाले दर्शक भी खुद को ठगा सा महसूस करने लगे है। यही कारण है माचिया पार्क में दर्शक संख्या लगातार घटकर अब नाम मात्र रह गई है। बॉयलोजिकल पार्क में लगे 3 फीट चौड़े व 2 फीट ऊंचे 20 साइनेज बोर्ड पूरी तरह खराब हो चुके है।
टाइगर के पिंजरे में मलबा-पत्थर
टाइगर व लॉयन के लिए प्राकृतिक, सुविधाजनक और मनोरंजन के लिए मचान का निर्माण किया गया था, लेकिन दीमक लगने से मचान पूरी तरह ध्वस्त होकर बिखरे अर्सा बीत चुका है। लेकिन माचिया जैविक उद्यान प्रशासन ने न तो लकड़ों का मलबा हटाया ना ही नए मचान निर्माण के लिए कोई कार्रवाई की। लॉयन व टाइगर अपने एन्क्लोजर्स में विचरण के दौरान आसानी से मचान पर घूमने व सर्दी में धूप का सेवन करने में दिक्कते आती है।
यह भी है परेशानियां
- पिंजरों में जगह जगह नुकीले पत्थर
- पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं हो से सूख रहे पेड़ पौधे
- कई स्थानों पर पाइप लाइन टूटी होने से बह रहा व्यर्थ पानी
- किसी भी एनक्लोजर में वन्यजीवों के जलकुण्ड में नहीं पानी की व्यवस्था
- फुटपाथ एवं पिंजरों के पास लगे पोल टूटे
- पूरे माचिया जैविक उद्यान के सीसीटीवी कैमरे लंबे अर्से से बंद
Published on:
03 Dec 2020 10:36 pm
