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Susvani Mata 16 भुजाधारी सुसवाणी माता के दर्शनार्थ देश भर से आते है श्रद्धालु

locationजोधपुरPublished: Oct 23, 2023 09:19:04 pm

Submitted by:

Amit Dave

- 12वीं शताब्दी में बीकानेर के मोरखाणा में स्थापित है मुख्य मंदिर

Susvani Mata 16 भुजाधारी सुसवाणी माता के दर्शनार्थ देश भर से आते है श्रद्धालु
Susvani Mata 16 भुजाधारी सुसवाणी माता के दर्शनार्थ देश भर से आते है श्रद्धालु
जोधपुर।

मण्डोर उद्यान के पहले सुसवाणी माता का मंदिर है। मंदिर में शेर पर सवार 16 भुजाधारी सुसवाणी माता की

मूर्ति स्थापित है, जिसके दर्शनार्थ देशभर से श्रद्धालु आते है। मंदिर में स्थापित मूर्ति को जयपुर के कारीगरों ने बनाया था। मंदिर के तोरणद्वार के दोनों ओर काला व गोरा भैरूजी की प्रतिमाएं स्थापित है। प्रतिवर्ष बसंत पंचमी के दूसरे दिन षष्टमी को पाटोत्सव मनाया जाता है, जिसमें ओसवाल सुराणा सांखला खांप सहित सभी वर्गो के लोग शामिल होकर माताजी की पूजा करते है। सुराणा-सांखला ओसवाल बंधुओं के प्रयास से सुसवाणी माता मंदिर की स्थापना की गई, जिसका संचालन वर्तमान में सुराणा सांखला भाईपा ट्रस्ट कर रहा है। आश्विन वद एकम से दसमी तक नवरात्रा में विशेष आयोजन किए जाते है ।
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12 शताब्दी में मोरखाणा में बना मुख्य मंदिर

सुराणा सांखला भाइपा की कुलदेवी सुसवाणी माता का मुख्य मंदिर बीकानेर के मोरखाणा गांव में स्थापित है। विक्रम संवत 1229 (वर्ष 1173-74 ईस्वी) में जैसलमेरी पत्थरों से 16 स्तंभों से निर्मित है। परिसर में कैरा का एक पेड़ भी है, जो उस किंवदंती का हिस्सा है जहां सुसवाणी माता ने शेर पर सवार होकर पृथ्वी में प्रवेश किया था। निज मंदिर के पास एक पुराना शिव मंदिर स्थित है। माना जाता है कि शिवजी ने वहां से चिमटा फेंका था, जो मौजूदा कैरा पेड़ के बीच गिरा, जिससे वह धरती समेत दो हिस्सों में बंट गया तथा सुसवाणी माता बादशाह तुरक से स्वयं का बचाव करते हुए अपने सिंह के साथ पृथ्वी में समा गईं और पृथ्वी फिर से बंद हो गई लेकिन माताजी का एक हाथ आशीर्वाद स्वरूप बाहर रह गया जो आज भी निज मंदिर में पूजा जाता है।

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