जोधपुर में बच्चों को लग गए दिमागी बुखार के नकली वैक्सीन, मामला पकड़ में आने पर जला डाले बिल!

को दिमागी बुखार से बचाने वाले मेनाक्ट्रा वैक्सीन के नकली टीके जोधपुर में कई बच्चों को लगा दिए जाने का मामला सामने आया है। नकली टीके एक स्थानीय फार्मासिस्ट ने भटिंडा, अहमदाबाद व दिल्ली से मंगवाए थे।

अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. बच्चों को दिमागी बुखार से बचाने वाले मेनाक्ट्रा वैक्सीन के नकली टीके जोधपुर में कई बच्चों को लगा दिए जाने का मामला सामने आया है। नकली टीके एक स्थानीय फार्मासिस्ट ने भटिंडा, अहमदाबाद व दिल्ली से मंगवाए थे। फार्मासिस्ट ने मामला पकड़े जाने के बाद कई नकली वैक्सीन अपने रिश्तेदार के घर ले जाकर जला भी दिए। जांच में पुष्टि के बाद औषधि नियंत्रक ने फर्म के मालिक शिशु रोग चिकित्सक डॉ. धरमचंद मुहनोत के जालोरी गेट राजदान मेंशन स्थित वर्धमान मेडिकोज का खुदरा व थोक लाइसेंस निरस्त कर दिया है।

औषधि नियंत्रण विभाग ने गत मार्च में जयपुर के शिवपुरी कॉलोनी कालवाड रोड झोटवाडा की मैसर्स वी-क्योर फर्म से नकली मेनाक्ट्रा वैक्सीन (बैच संख्या-यू59999एइ, निर्माता सनोफी पास्टयोर इंक) बरामद किए थे। जांच में ये वैक्सीन जोधपुर के वर्धमान मेडिकोज को बेचने की बात सामने आई। इस पर यहां तहकीकात की गई तो फर्म ने ये वैक्सीन सनोफी कंपनी से मंगवाना बताया, लेकिन जांच में पता चला कि वैक्सीन भटिंडा, अहमदाबाद व दिल्ली से मंगवाए गए थे। फर्म के बिलों में भी हेराफेरी मिली। इसी बैच के कई नकली वैक्सीन बेचे जाने के बिल भी हाथ लग गए। यानी जांच से पहले नकली इंजेक्शन कई बच्चों को लगा भी दिए गए। जांच के दौरान फर्म की रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट सुमन परिहार तो सामने भी नहीं आई।

कंप्यूटर में स्टॉक शून्य, फिर भी बिक्री
जांच में पाया गया कि फर्म के पास 1 फरवरी को मेनेक्ट्रा वैक्सीन का स्टॉक शून्य था, लेकिन इस दिन खुदरा मेडिकल स्टोर व चिकित्सकों को वैक्सीन बेचे गए हैं। जांच में वैक्सीन बाहरी फर्मों से बिना बिल खरीदे जाने की भी पुष्टि हुई।

कम दर में खरीदे वैक्सीन!
दिल्ली, अहमदाबाद व भटिंडा से खरीदे गए वैक्सीन की दर 32 सौ 34 सौ रुपए के मध्य होती है, लेकिन वर्धमान मेडिकोज ने कंपनी की तय दर से कम रेट में वैक्सीन खरीदना बताया। वैक्सीन 2 हजार में बेचे जाने के बिल मिले। संबंधित वैक्सीन के वाइल पर भी फर्जी लेबल मिले हैं। भौतिक सत्यापन में और भी कई वैक्सीन के बिलों में गड़बड़ी सामने आई।

इनका कहना है
हमने फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। कई तरह की गड़बडिय़ां जांच में मिली है। इस फर्म सहित अन्य के खिलाफ जयपुर में एफआइआर दर्ज करवाई जा चुकी हैं।
- राकेश वर्मा, सहायक औषधि नियंत्रक, जोधपुर

Harshwardhan bhati
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