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महिलाओं के हाथ में होगी जोधपुर की जिम्मेदारी, दोनों नगर निगम सामान्य महिला महापौर वर्ग के लिए आरक्षित

शहर के विकास को गति देने के लिए नगर निगम दो भागों में बंटा। अब उत्तर और दक्षिण नगर निगम में महापौर महिला बैठेगी। जयपुर में सोमवार को हुई निकाय प्रमुख आरक्षण लॉटरी में जोधपुर के दो निगम में महापौर की सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुई है।
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general category women can contest nagar nigam election in jodhpur

महिलाओं के हाथ में होगी जोधपुर की जिम्मेदारी, दोनों नगर निगम सामान्य महिला महापौर वर्ग के लिए आरक्षित

अविनाश केवलिया/जोधपुर. शहर के विकास को गति देने के लिए नगर निगम दो भागों में बंटा। अब उत्तर और दक्षिण नगर निगम में महापौर महिला बैठेगी। जयपुर में सोमवार को हुई निकाय प्रमुख आरक्षण लॉटरी में जोधपुर के दो निगम में महापौर की सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुई है। ऐसे में महिलाओं की राजनीतिक भूमि मजबूत होगी तो वहीं कई मंझे हुए नेताओं की उम्मीदें धूमिल होती जा रही है। कई बड़े नेताओं के महिला रिश्तेदार भी राजनीतिक मैदान पर उतर सकते हैं। जोधपुर नगर निगम में 2004 के बाद एक बार फिर महिला महापौर बन सकती है।

नगर निगम बनने के बाद यह दूसरी बार यह है जब महिला को कमान दी जाएगी। 2004 से 2009 तक कांगे्रस की ओमकुमारी गहलोत ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। इससे पहले कुछ दिन के लिए कार्यवाहक के तौर पर संगीता सोलंकी ने भी महापौर का काम देखा। अब दोनों नगर निगम की कमान महिलाओं के हाथ में रहने से कई राजनीतिक समीकरण भी बदल जाएंगे। कई महिला नेता प्रभावशाली होंगी तो नई महिलाओं के लिए भी राजनीति में जमीन तैयार होगी।

कांग्रेस में महिला नेत्रियां
- कुंती देवड़ा
- संगीता बेनीवाल
- फरजाना चौहान
- शुभलक्ष्मी पुरोहित
- कल्पना सिंघी
- इंदिरा भाटी

भाजपा में महिला नेतृत्व
- संगीता सोलंकी
- वनिता सेठ
- इंद्रा राजपुरोहित
- अमिता चौधरी
- सीमा माथुर

वो दिग्गज जिनके हाथ नहीं आएगी कुर्सी

कांग्रेस के दिग्गज
- राजेन्द्र सोलंकी
- रामेश्वर दाधीच
- सुनील परिहार
- गणपतसिंह चौहान
- अ. मजीद गौरी
- सुनील व्यास
- डॉ. अजय त्रिवेदी

भाजपा में बड़े नाम जो खाली रहेंगे
- घनश्याम ओझा
- राजेन्द्र गहलोत
- जगतनारायण जोशी
- मेघराज लोहिया
- देवेन्द्र सालेचा
- प्रसन्न मेहता

अब दिग्गजों के महिला रिश्तेदार उतर सकते हैं रण में
महिला सीट होने के कारण अब अधिकांश दिग्गज नेता अपने महिला रिश्तेदारों को चुनावी रण में उतार सकते हैं। वार्ड आरक्षण प्रक्रिया एक बार फिर से होगी। ऐसे में यह भी उम्मीद है कि जो वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं है वहां भी कई नेता अपने रिश्तेदारों को चुनाव लड़वा सकते हैं। आरक्षण के लिए लिहाज से 33 प्रतिशत ही महिलाएं पार्षद बनेगी। लेकिन जब दोनों सीटें महिला महापौर की होगी तो महिला पार्षदों का यह प्रतिशत बढ़ भी सकता है।